कब नहीं खरीदनी चाहिए सेकंड हैंड कार? लेने पर फायदे से ज्यादा होगा नुकसान
सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले इंजन, गियरबॉक्स, चेसिस, कागजात और सर्विस रिकॉर्ड जांचें, ताकि भविष्य में अतिरिक्त खर्च से बच सकें।

सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। आजकल कई लोग नई कार खरीदने के बजाय सेकंड हैंड कार खरीदना पसंद करते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह कम कीमत में कार मिलने का विकल्प है। हालांकि, पुरानी कार खरीदते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। कई बार कार बाहर से अच्छी दिखाई देती है, लेकिन उसके इंजन, गियरबॉक्स, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स या दूसरे जरूरी हिस्सों में खराबी होती है। ऐसे में कार खरीदने के बाद मरम्मत पर काफी पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। इसलिए सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले उसकी स्थिति, कागजात और सर्विस रिकॉर्ड की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। आइए जानते हैं कि किन परिस्थितियों में पुरानी कार खरीदने से बचना चाहिए।
1. पानी में डूबी हुई सेकंड हैंड कार न खरीदें
अगर कोई कार बाढ़ या भारी बारिश के दौरान पानी में डूब चुकी है, तो उसे खरीदने से बचना चाहिए। पानी कार के इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, वायरिंग और सेंसर को नुकसान पहुंचा सकता है। कई बार ये खराबियां कार खरीदने के कुछ समय बाद सामने आती हैं, जिससे मरम्मत का खर्च बढ़ सकता है। इसके अलावा, पानी में डूबी कार की सीटों और केबिन के दूसरे हिस्सों में सीलन और बदबू की समस्या भी हो सकती है। इसलिए सेकंड हैंड कार खरीदते समय उसकी पिछली स्थिति के बारे में जानकारी लें और किसी भरोसेमंद मैकेनिक से उसकी जांच जरूर कराएं।
2. बड़े एक्सीडेंट वाली कार खरीदने से बचें
अगर किसी पुरानी कार का बड़ा एक्सीडेंट हुआ है और उसके चेसिस या फ्रेम को नुकसान पहुंचा है, तो ऐसी कार खरीदना जोखिम भरा हो सकता है। कार का ढांचा उसकी मजबूती के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसमें खराबी होने पर वाहन की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हो सकती है। कई बार एक्सीडेंट के बाद कार की बाहरी बॉडी की मरम्मत कर दी जाती है, जिससे वह देखने में अच्छी लगती है। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि कार के अंदरूनी हिस्से भी सही स्थिति में हैं। इसलिए कार की बाहरी बनावट देखकर ही फैसला न लें। खरीदने से पहले चेसिस, फ्रेम और दूसरे जरूरी हिस्सों की जांच किसी भरोसेमंद मैकेनिक से कराएं।
3. जरूरी कागजात और सर्विस रिकॉर्ड न होने पर न खरीदें
सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले उसके सभी जरूरी दस्तावेजों की जांच करना बेहद जरूरी है। अगर कार बेचने वाला रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), वैध इंश्योरेंस और दूसरे आवश्यक कागजात दिखाने से बच रहा है, तो जल्दबाजी में सौदा नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही कार की सर्विस हिस्ट्री भी देखनी चाहिए। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कार की समय-समय पर देखभाल हुई है या नहीं। अगर कार के मीटर पर कम किलोमीटर दिख रहे हैं, लेकिन सर्विस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो उसकी वास्तविक दूरी को लेकर संदेह हो सकता है। कुछ मामलों में ओडोमीटर के साथ छेड़छाड़ करके कार की चली हुई दूरी कम दिखाई जाती है। इसलिए कार की किलोमीटर रीडिंग और उपलब्ध सर्विस रिकॉर्ड का मिलान करें। अगर जानकारी में अंतर दिखाई देता है, तो कारण स्पष्ट होने तक खरीदारी का फैसला न लें।
4. बैंक लोन वाली कार खरीदने से पहले करें चेक
अगर सेकंड हैंड कार पर बैंक का लोन बकाया है, तो उसे खरीदने से पहले संबंधित लोन की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। यह सुनिश्चित करें कि बकाया लोन चुकाने की प्रक्रिया क्या है और बैंक से जरूरी दस्तावेज मिलेंगे या नहीं। बिना उचित पुष्टि के ऐसी कार खरीदने पर भविष्य में वाहन को अपने नाम ट्रांसफर कराने में परेशानी हो सकती है। इसलिए सौदा पूरा करने से पहले लोन और दस्तावेजों से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी की पुष्टि करें।
5. बंद हो चुके मॉडल की कार खरीदने से पहले सोचें
कुछ पुरानी कारों के मॉडल बंद हो चुके हैं या उनकी कंपनियों ने भारत में कारोबार बंद कर दिया है। ऐसी कार खरीदने से पहले यह पता करना जरूरी है कि उसके स्पेयर पार्ट्स आसानी से उपलब्ध हैं या नहीं। अगर जरूरी पार्ट्स मिलना मुश्किल है, तो कार खराब होने पर उसे ठीक कराने में ज्यादा समय और पैसे लग सकते हैं। इसलिए केवल कम कीमत देखकर ऐसी कार खरीदने का फैसला न करें। उसके पार्ट्स की उपलब्धता और भविष्य में होने वाली संभावित मरम्मत को भी ध्यान में रखें।
6. टैक्सी में इस्तेमाल हुई कार न लें
पहले टैक्सी के रूप में इस्तेमाल की गई कार खरीदते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसी कारें कई बार लंबे समय तक चलाई जाती हैं, जिससे इंजन, क्लच, ब्रेक और सस्पेंशन जैसे जरूरी हिस्सों पर अधिक असर पड़ सकता है। कार खरीदने से पहले उसकी मौजूदा स्थिति की जांच कराएं। सिर्फ उसके बाहरी लुक या कम कीमत के आधार पर फैसला न लें। इंजन और दूसरे महत्वपूर्ण पार्ट्स की स्थिति समझने के बाद ही खरीदारी पर विचार करें।
टेस्ट ड्राइव के दौरान इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले टेस्ट ड्राइव लेना जरूरी है। इस दौरान कार के इंजन, गियरबॉक्स और ड्राइविंग व्यवहार पर ध्यान दें। कुछ संकेत ऐसी खराबियों की ओर इशारा कर सकते हैं, जिनकी जांच कराना जरूरी है।
- साइलेंसर से नीला धुआं: अगर इंजन चालू होने या कार चलाने के दौरान साइलेंसर से नीला धुआं निकलता है, तो इंजन की स्थिति की जांच कराएं।
- गियर बदलते समय झटके: गियर बदलते समय झटके महसूस होने पर गियरबॉक्स की जांच जरूरी है।
- कार का एक तरफ खिंचना: अगर कार चलाते समय एक तरफ खिंचती है, तो उसके संबंधित हिस्सों की जांच कराएं।
इन संकेतों को नजरअंदाज करके कार खरीदना आगे चलकर महंगा पड़ सकता है। अगर टेस्ट ड्राइव के दौरान कोई समस्या दिखाई देती है, तो खरीदारी से पहले उसकी वजह और मरम्मत की जरूरत स्पष्ट कर लें।
सेकंड हैंड कार खरीदने से पहले मैकेनिक से कराएं जांच
पुरानी कार खरीदने का फैसला करने से पहले किसी भरोसेमंद मैकेनिक से उसकी पूरी जांच कराना समझदारी भरा कदम है। जांच में इंजन, गियरबॉक्स, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, चेसिस और फ्रेम की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही कार के दस्तावेज, इंश्योरेंस और सर्विस रिकॉर्ड की जांच भी करें। अगर किसी हिस्से में खराबी मिलती है या दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी स्पष्ट नहीं है, तो बिना पुष्टि के सौदा पूरा न करें। इससे गलत कार खरीदने और बाद में होने वाले अतिरिक्त खर्च से बचने में मदद मिल सकती है।
