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एक पेपरवेट से Bentley को आया बड़ा आइडिया, हमेशा के लिए बदल गई कारों की दुनिया

Published: Mon, 12 Jan 2026 07:00 PM (IST)

भारत सहित दुनियाभर में बेहद लग्‍जरी कारों को ऑफर करने वाली Bentley को एक पेपरवेट से बड़ी प्रेरणा मिली। जिसके ...और पढ़ें

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HighLights

  1. बेंटले को एल्यूमीनियम पेपरवेट से मिली प्रेरणा

  2. एल्‍यूमिनियम से हल्के इंजन विकसित किए

  3. दुनियाभर में लग्‍जरी कारों को करती है ऑफर

ऑटो डेस्‍क, नई दिल्‍ली। भारत के साथ ही दुनिया के सभी देशों में सामान्‍य कारों के साथ ही कुछ बेहद खास कारों को ऑफर किया जाता है। इन लग्‍जरी कारों में Bentley भी अलग जगह रखती है। लेकिन क्‍या आपको पता है कि बेंटले की कारों का साधारण से पेपरवेट के साथ काफी गहरा संबंध है। किस तरह से एक पेपरवेट ने बेंटले की कारों की दुनिया को पूरी तरह से बदल दिया। हम आपको इस खबर में बता रहे हैं।

पेपरवेट से है Bentley का खास संबंध

बेंटले को दुनियाभर में बेहद खास और लग्‍जरी वाली कारों की निर्माता के तौर पर पहचाना जाता है। निर्माता की ओर से बनाई जाने वाली कारों को दुनियाभर में मशहूर हस्‍तियां उपयोग करती हैं। इस कार निर्माता का एक साधारण से पेपरवेट के साथ कई साल पुराना संबंध है।

क्‍यों है खास

बेंटले के लिए पेपरवेट काफी ज्‍यादा खास है। दरअसल, दुनिया की सबसे शानदार कार निर्माता बेंटले को आज की कारों को बनाने का आइडिया एक पेपरवेट से मिला था। बेंटलें की नींव रखने वाले ओवेन बेंटले की कोशिश एक ऐसी गाड़ी को बनाना था जो न सिर्फ लंबे समय तक भरोसेमंंद रहे बल्कि वह काफी तेज होने के साथ ही बेहद मजबूत भी हो। इसके लिए उन्‍होंने 1913 में फ्रांस की एक कार फैक्‍ट्री का दाैरा किया जहां पर उनकी नजर एक एल्‍यूमिनियम से बने पेपरवेट पर गई। यहीं से उनको यह विचार मिला कि अगर कार के पिस्‍टन को लोहे या स्‍टील की जगह एल्‍यूमिनियम से बनाया जाए तो यह वजन में कम होने के साथ ज्‍यादा ताकतवर भी हो सकते हैं। 

प्रेरणा से किया यह काम

वापस लौटकर उन्‍होंने एल्‍यूमिनियम की 88 फीसदी मात्रा और 12 फीसदी कॉपर के साथ खास मिश्रण तैयार किया। इससे बने पिस्‍टन को जब कार में लगाया गया तो इंजन न सिर्फ ज्‍यादा ताकतवर हो गए बल्कि वह जल्‍दी गर्म भी नहीं हुए। इसी से प्रेरणा लेकर उन्‍होंने प्रथम विश्‍व युद्ध के बाद बेंटले की शुरुआत की। 

पहली कार में किया उपयोग

बेंटले ने जब अपनी पहली कार के तौर पर तीन लीटर बेंटले को पेश किया तो उस कार में इसी तकनीक का उपयोग किया और इससे इंजन ताकतवर होने के साथ वजन में भी कम रहा। इस तरीके से उनकी बेंटले को एक निर्माता के तौर पर दुनियाभर में मशहूर कर दिया। 

पांच बार जीती रेस

बेंटले की कार ने 1924 से 1930 के बीच24 आवर्स रेस को भी जीता और अपनी तकनीक को कई बार साबित भी किया। उसी दौरान बेंटले की छवि ऐसी कार निर्माता के तौर पर बन गई जो न सिर्फ तेज चलती थी बल्कि वह लंबे समय तक टिक भी पाती थी।

ट्रेन को भी किया पीछे

1925 में बेंटले के चेयरमैन वूल्‍फ बार्नाटो ने एक शर्त लगाई। जिसके मुताबिक स्‍पीड सिक्‍स बेंटले से फ्रॉन्‍स के कॉन्‍स से लेकर लंदन के ब्‍लू तक ट्रेन से पहले पहुंचना था। रेस शुरू हुई लेकिन मंजिल तक ट्रेन के मुकाबले बेंटले चार मिनट पहले पहुंच गई। इस दौरान कार की स्‍पीड 140 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्‍यादा रही थी। जिसके बाद यह कार ब्‍लू ट्रेन बेंटले नाम से काफी मशहूर भी हुई। 

Volkswagen ग्रुप के पास है स्‍वामित्‍व

बेंटले की शुरूआत भले ही एक वाहन‍ निर्माता के तौर पर 1919 में हुई। लेकिन 1931 में आर्थिक संकट के कारण इसे Rolls Royce ने खरीद लिया। इसके बाद 1998 में इसका अधिग्रहण दुनिया की सबसे बड़ी वाहन निर्माताओं में शामिल Volkswagen ग्रुप ने कर लिया।

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