नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। इसमें कोई शक नहीं है कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बहुत तेजी से विकसित हो रही है। यहां हर दिन कोई एक नई तकनीक, कोई नई योजना पेश की जा रही है। इसी में से एक ऑटोनोमस कारें भी हैं। इन्हे सेल्फ ड्राइविंग कार भी कहा जाता है। खुद से चलने वाली ये कारें अभी मार्केट में काफी डिमांड की जा रही हैं। इसमें मुख्य रूप से टेस्ला, फोर्ड और ऐपल जैसी कंपनियों के नाम आते हैं। लेकिन इन कारों को लेकर सबसे बड़ा सवाल है कि अगर सेल्फ ड्राइविंग के दौरान कोई दुर्घटना हो जाती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा- कार कंपनी या चालक? तो चलिए जानते हैं कि सेल्फ ड्राइविंग वाली कारों को लेकर क्या नियम बनाए गए हैं।

क्या होती हैं ऑटोनोमस या सेल्फ ड्राइविंग कार

सेल्फ ड्राइविंग कारों से जुड़े नियम जानने से पहले ये जानना जरूरी है कि असल में ये किस तरह की कार होती हैं और यह काम कैसे करती हैं। यह वैसी कारें होती हैं जिनको चलाने के लिए ड्राइवर की जरूरत नहीं होती है। यह अपने सेंसर से अपने आस-पास के मौहोल को समझती हैं और बिना किसी इंसानी हस्तक्षेप के खुद को संचालित करने और ड्राइविंग के दौरान जरूरी निर्णयों करने में सक्षम है। इसके लिए इस तरह की कारों में अल्ट्रासोनिक सेंसर को लगाया जाता है। इन सेंसरों से मिलने वाली जानकारी को केबिन में लगे कंप्यूटर डिस्प्ले, पावरट्रेन और कैमरों को दी जाती है।

दुर्घटना होने पर किसे मिलेगी सजा?

दुनियाभर में यह एक गंभीर बहस का विषय है, क्योंकि ऑटो पायलेट मोड में सारा कंट्रोल कार के AI सिस्टम के पास होता है, बस आपातकालीन स्थिति में ड्राइवर को निर्णय लेना होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि तब दुर्घटना में किसको जिम्मेदार ठहराया जाए? ऑटो पायलेट तकनीक को सजा नहीं दी जा सकती और ड्राइविंग के समय ड्राइवर गाड़ी नहीं चला रहा था। तो आपको बता दें की ऐसी स्थिति में भी ड्राइवर को ही सजा दी जाएगी।

क्यों होगा ड्राइवर जिम्मेदार?

सेल्फ ड्राइविंग मोड में होने पर भी दुर्घटना होने पर ड्राइवर को जिम्मेदार ठहराया जाता है क्योंकि वैसे देश जहां सार्वजनिक सड़कों पर सेल्फ-ड्राइविंग वाहनों (Self Driving Car) को अनुमति दी गई है, वहां कुछ नियम भी बनाए गए हैं। इन नियमों में कहा गया है कि ऐसी कारों में ड्राइवर को ड्राइविंग के दौरान हर समय स्टीयरिंग पर हाथ रखना होगा। साथ ही उसे हर समय ध्यान देने की भी जरूरत है ताकि आपात स्थिति के मामले में वह नियंत्रण अपने हाथ में ले सके।

जाना पड़ सकता है जेल

अगर सजा की बात करें तो ऑटो पायलेट मोड में हुई दुर्घटना में दोषी पाए गए ड्राइवर को जेल भी हो सकती है। यूनाइटेड किंगडम में इसके लिए खास ड्राइविंग नियम बनाए गए है, जिसमें ड्राइवर को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। वहीं, ब्रिटेन ने इस तरह के दादियों के लिए सामान्य से कम स्पीड लिमिट को तय किया है।

Edited By: Sonali Singh