गाड़ी में PPF लगवाना कितना सही, क्या हैं इसके फायदे और नुकसान
गाड़ी के पेंट को खरोंच और UV किरणों से बचाने के लिए PPF एक लोकप्रिय विकल्प है। हालांकि, यह महंगा ...और पढ़ें


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ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। गाड़ी खरीदने से पहले ही सभी को चिंता रहती है कि उसकी शाइन को बरकरार कैसे रखें और स्क्रैच से कैसे बचाएं। ऐसे में PPF एक काफी लोकप्रिय ऑप्शन है जिसे बहुत सारे लोग अपनी गाड़ियों पर लगवाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्या यह वाकई जरूरी है या नहीं? आइए जानते हैं इसके फायदे और नुकसान।
PPF एक ट्रांसपेरेंट और मजबूत पॉलीयूरेथेन कोट होती है जिसे गाड़ी के बाहरी पेंट पर चढ़ाया जाता है। यह एक इनविजिबल सुरक्षा कवच की तरह काम करती है।
क्या हैं इसके फायदे?
- खरोंच और निशान: सड़क पर उड़वे वाले छोटे पत्थरों, झाड़ियों या चाबी से लगने वाले हल्के स्क्रैच से पेंट पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
- सेल्फ-हीलिंग प्रॉपर्टी: प्रीमियम PPF की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर इस पर हल्की खरोंच आती है तो ये धूप या हल्की गर्मी मिलने पर खुद ठीक हो जाता है।
- शाइनिंग बरकरार रखना: यह गाड़ी के पेंट को सूरज की खरतनाक UV किरणों से बचाता है जिससे समय के साथ कार की कलर फीका नहीं पड़ता।
- सफाई में आसानी: इस पर धूल-मिट्टी कम टिकती है और दाग-धब्बों को साफ करना बहुत ही आसान हो जाता है।
PPF के नुकसान
- महंगा: PPF कराना बहुत ही खर्चीला होता है। यह एक पूरी कार पर PPF लगवाने का खर्च 50,000 रुपए से लेकर 1.5 लाख या उससे भी ज्यादा हो सकता है।
- लगाने में दिक्कत: अगर इसे सही तरीके से न लगाया जाए तो फिल्म के अंदर बबल्स बन सकते हैं जिससे गाड़ी का लुक पूरा खराब हो सकता है।
- डबल खर्च: अगर एक्सीडेंट में गाड़ी का कोई हिस्सा डैमेज होता है तो उस पूरे पैनल की PPF शीट को फिर से नया लगाना पड़ता है।
लगाना चाहिए या नहीं?
अगर आपकी गाड़ी बहुत ही महंगी है और आप इसे 5-7 साल तक बिल्कुल नई जैसी शाइन रखना चाहते हैं और बजट अच्छा है तो इसे लगाया जा सकता है। वहीं, अगर आपका बजट लिमिटेड है और गाड़ी को कुछ ही सालों में बदलने वाले हैं तो ऐसे में PPF की जगह Ceramic Coating या टेप्लॉन/वैक्स पॉलिशिंग एक सस्ता और बेहतर विकल्प हो सकता है।
