नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। बाइक का इंश्योरेंस या बीमा कराना बेहद जरूरी है। बिना इसके किसी भी गाड़ी को सड़कों पर नहीं चलाया जा सकता है। अगर आप पहली बार अपनी मोटरसाइकिल का इंश्योरेंस कराने जा रहे हैं तो आपको बता दें कि बाइक के मॉडल, इसकी एज जैसी चीजों पर इसकी इंश्योरेंस पॉलिसी निर्भर करती है।

पर एक और जरूरी चीज भी है, जिस पर ज्यादा लोगों का ध्यान नहीं जाता है। यह है बाइक की इंजन पावर, जिसे क्यूबिक कैपेसिटी या CC से प्रदर्शित किया जाता है। बाइक की CC के आधार पर इंश्योरेंस प्रीमियम की रेट तय की जाती है और इस आधार पर आपको मासिक किस्त या EMI देना पड़ता है। तो चलिए जानते हैं कि इसे इंजन पावर के आधार पर कैसे सेट किया जाता है।

क्या होती है क्यूबिक कैपेसिटी?

किसी बाइक की क्यूबिक कैपेसिटी इसके इंजन का अधिकतम पावर आउटपुट होता है। किसी भी गाड़ी के चेम्बर या सिलिंडर को क्यूबिक सेंटीमीटर में नापा जाता है और इसे ही क्यूबिक कैपेसिटी या CC कहा जाता है। हॉर्सपावर, टॉर्क और ईंधन की खपत के लिए इंजन कितनी पावर जनरेट करता है, यह जानने में CC का मुख्य काम होता है। सरल शब्दों में कहें तो किसी बाइक में जितना ज्यादा CC होगा उसकी पावर आउटपुट भी उतनी ही होगी।

CC कैसे करता इंश्योरेंस प्रीमियम को प्रभावित?

अलग-अलग बाइक के लिए इंश्योरेंस प्रीमियम अलग-अलग होती हैं। बाइक इंश्योरेंस प्लान मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं- थर्ड-पार्टी और कंप्रिहेंसिव, जिसमें से थर्ड-पार्टी लायबिलिटी प्लान तीसरे पक्ष की चोट या तीसरे पक्ष की मृत्यु या उनकी संपत्ति को नुकसान के खिलाफ कवरेज प्रदान करता है। इसलिए, IRDAI थर्ड पार्टी टू-व्हीलर इंश्योरेंस प्लान के लिए बीमा प्रीमियम का निर्धारण करता है। इसके आधार पर स्लैब दरें नीचे दी गई है।

इंश्योरेंस प्रीमियम रेट-

75cc के नीचे इंजन CC           482 रुपये

75cc से 155cc के बीच           752 रुपये

150cc से 350cc के बीच        1,366 रुपये

350cc से ऊपर                      2,804 रुपये

(नोट- यह रेट सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है।)

Edited By: Sonali Singh

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