क्यों कहा जाता है 'तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा', क्या सच में अशुभ होता है अंक 3?
हम बचपन से सुनते आए हैं तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा। क्या सच में 3 का अंक अशुभ होता है? जानें ...और पढ़ें

तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा कहावत का रहस्य । (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
'तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा' एक प्रचलित लोक कहावत है।
अंक ज्योतिष में 3 को देवगुरु बृहस्पति से जुड़ा शुभ अंक माना गया है।
धार्मिक ग्रंथों में अंक 3 को अशुभ नहीं बताया गया है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हम बचपन से अपने बड़े-बुजुर्गों से सुनते आए हैं 'तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा'। इसका अर्थ बहुत ही स्पष्ट है। कोई भी काम, चीज या अन्य कुछ भी तीन की संख्या में यदि होता है, तो वह बिगड़ ही जाता है। जैसे- घर से कभी भी तीन लोगों को साथ नहीं निकलना चाहिए, क्योंकि तीन लोग एक साथ निकलते हैं, तो जो काम करने जा रहे हैं वह बिगड़ जाता है।
यह कहावत वर्षों से प्रचलित है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस कहावत के पीछे कोई ज्योतिषीय महत्व है या नहीं? जबकि न्यूमेरोलॉजी में अंक 3 को बेहद खास माना जाता है। इसका संबंध देवगुरु बृहस्पति से होता है, जो ज्ञान, बुद्धि, भाग्य और समृद्धि के कारक हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अंक 3 इतना शुभ है, तो फिर इसे काम बिगड़ने से क्यों जोड़ा जाता है? आइए जानते हैं।
हिंदू धर्म में तीन अंक का क्या है महत्व?
हिंदू धर्म में तीन अंक का विशेष धार्मिक महत्व है। भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान महेश को त्रिदेव कहा जाता है। इसी तरह, भगवान शिव के त्रिशूल का संबंध भी तीन से है। सृष्टि की रचना, पालन और संहार में अंक 3 का विशेष महत्व है। लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती, देवियां भी तीन हैं।
इसके अलावा, धार्मिक ग्रंथों में त्रिगुण यानी सत्व, रजस और तमस का उल्लेख मिलता है। श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 14 के श्लोक 5 में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि प्रकृति से उत्पन्न सत्व, रजस और तमस, ये तीनों गुण अविनाशी आत्मा को शरीर में बांधते हैं। ये तीनों गुण प्रकृति और मनुष्य के स्वभाव को समझने का एक आधार माने जाते हैं। ऐसे में तीन अंक को पूरी तरह अशुभ माना जाए, ऐसा किसी धार्मिक ग्रंथ में नहीं मिलता है।
इसलिए धार्मिक दृष्टि से तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा, को केवल एक लोक मान्याता या फिर लोक कहावत ही कहा जात सकता है।
क्या अंक 3 वास्तव में काम बिगाड़ता है?
अंक ज्योतिष में अंक 3 को देवगुरु बृहस्पति के स्वामित्व वाला अंक बताया गया है। बृहस्पति को शुभ ग्रह माना जाता है, इसलिए अंक तीन को हर लिहाज से अंक शास्त्र में शुभ माना गया है। यहां भी इस कथन को केवल एक कहावत कहा जा सकता है
फिर क्यों कहा जाता है तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा?
दरअसल, लोक मान्यता के आधार पर ऐसा कहा जाता है कि 3 लोग, कोई सामान, या फिर किसी भी चीज की 3 संख्या, उसे असंतुलित करती है। जैसे दो लोगों की बातचीत में तीसरे के पड़ने से बात बिगड़ सकती है। किसी काम को पूरा करने के लिए 2 की जगह 3 लोग होंगे, तो हो सकता है कि विचारों में असंतुलन हो और काम पूरा न हो पाए। वहीं सम संख्या में लोग, काम और किसी अन्य चीज के होने पर स्थिति संतुलित रहती है। इसमें धार्मिक की जगह व्यवहारिक सोच शामिल है।
अत: कहा जा सकता है कि तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा केवल एक लोक कहावत है, इसका कोई धार्मिक महत्व नहीं है।
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