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ई-सिगरेट के धुंए में गुम हो रही जिंदगियां

जागरण संवाददाता, देहरादून: राज्य में 22 लाख लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते है। इनमें

By Edited By: Published: Sat, 05 Sep 2015 10:39 PM (IST)Updated: Sat, 05 Sep 2015 10:39 PM (IST)
ई-सिगरेट के धुंए में गुम हो रही जिंदगियां

जागरण संवाददाता, देहरादून:

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राज्य में 22 लाख लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते है। इनमें धुंआ रहित तंबाकू उत्पाद का सेवन करने वालों की तादाद आठ लाख है। लोगों में इलेक्ट्रानिक (ई) सिगरेट का क्रेज भी बढ़ रहा है। हर साल हजारों लोगों की कैंसर जैसी घातक बीमारी से मौत हो जाती है। तंबाकू और धूम्रपान की प्रभावी रोकथाम के लिए मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।

शनिवार को कचहरी के समीप एक होटल में तंबाकू नियंत्रण और मीडिया की भूमिका पर वायस ऑफ टोबैको विक्टिम्स (वीओटीवी) और डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स, भारत सरकार की ओर से आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने यह बात कही। वीओटीवी के संजय सेठ ने कहा कि तंबाकू नियंत्रण अधिनियम के अनुसार शैक्षणिक संस्थाओं के 100 गज की दूरी में तंबाकू उत्पाद बेचना, सार्वजनिक स्थानों में इस्तेमाल और विज्ञापन पर भी रोक है। स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी जौलीग्रांट के डॉ. सुनील सैनी ने कहा कि तंबाकू से संबंधित कैंसर पीड़ित युवा मरीजों की संख्या ओपीडी में लगातार बढ़ रही हैं। प्रति वर्ष तीन हजार से अधिक कैंसर के नए रोगी सामने आ रहे हैं। वीओटीवी की निदेशक आशिमा सरीन ने कहा कि ई-सिगरेट के नाम से तंबाकू सेवन का नया रूप सामने आ रहा है। कुछ राज्यों ने दुष्प्रभाव को देखते हुए इस पर प्रतिबंध लगा दिया है। एक रिपोर्ट में ई-सिगरेट के प्रयोग को खतरनाक मानते हुए विरोध किया है। ई-सिगरेट के सेवन से बच्चों को निकोटीन की लत लग जाती है और फिर वह अन्य रूपों में भी तंबाकू का सेवन करना शुरू कर देते है।


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