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बिन ट्रेनिंग कैसे बने साइना और सानिया!

Publish Date:Tuesday,Nov 12,2013 12:41:03 AM | Updated Date:Tuesday,Nov 12,2013 12:41:59 AM
बिन ट्रेनिंग कैसे बने साइना और सानिया!

संवाददाता, हाथरस : सरकार महिलाओं को खेलों में बढ़ावा देने का भले ही दावा करें। मगर, महिला खिलाड़ी सरकारी बदइंतजामी से लड़ रही हैं। संसाधनों के अभाव में खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही है।

स्कूलों में बदहाली

जिले में करीब 15 सौ से अधिक बेसिक और तीन सौ से अधिक माध्यमिक स्कूल हैं। इनमें खेल के नाम पर खेल ही हो रहा है। जहां तमाम विद्यालयों में खेल संसाधनों का अभाव है, तो वहीं कुशल प्रशिक्षक न होने के कारण वहां खेल की सुविधा नहीं मिल पाती। माध्यमिक स्कूलों में प्रतियोगिता के वक्त ही खेल कराये जाते है।

पायका तोड़ रही दम

सरकार ने ग्रामीण अंचल में क्रीड़ा मैदान पायका के तहत विकसित होने थे। ताकि प्रतिभाओं को तराशा जा सके। उन्हें सही प्रशिक्षण देकर आगे बढ़ाया जा सके, लेकिन बजट में अभाव में यह योजना शुरू होने के बाद दम तोड़ गई। प्रतिभाएं होने के बाद भी वो सही प्रशिक्षण को तरस गई। बात स्टेडियम की करें तो वहां भी हालत ठीक नहीं है। टेनिस, बास्केट बाल कोर्ट व एथलीट टै्रक अधूरे हैं। हालांकि बैडमिंटन कोर्ट तो है, लेकिन प्रशिक्षक नहीं हैं, जिससे प्रतिभा मुरझा रही हैं।

अभिभावकों की चिंता

बढ़ते महिला अपराधों के चलते कोई भी अभिभावक अपने बेटियों को घर से दूर भेजने के लिए सहर्ष तैयार नहीं होते। ग्रामीण क्षेत्र में तो और भी ज्यादा समस्याएं है।

मौजूद है सितारे

मुरसान की एथलीट मोनी यादव ने कई बार जिले का नाम रोशन किया, लेकिन स्टेडियम में प्रशिक्षण की व्यवस्था नही मिली। सादाबाद का रिंकू क्रिकेट में प्रदेश स्तर पर जलवा बिखेर रहा है। शहर के चित्रगुप्त नगर की सभ्यता कुलश्रेष्ठ बास्केट वाल में निपुण है, लेकिन प्रशिक्षण और संसाधनों के अभाव में प्रैक्टिस नहीं कर पाती।

इनकी सुनो

उनके यहां जो छात्राएं आती हैं, उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। लेकिन जिले में अन्य कोई व्यवस्था न होने के कारण प्रतिभाएं उभर नहीं पातीं।

सत्यदेव पचौरी, शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता, बागला डिग्री कालेज।

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जल्द ही स्टेडियम में अधूरे कोर्ट व टै्रक बनकर तैयार हो जाएंगे। लड़कियों को प्रशिक्षण देकर उनकी प्रतिभा को निखारा जाएगा।

रानी प्रकाश, जिला क्रीड़ा अधिकारी।

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लड़कियों के बोल

शहर में कोई ऐसी एकेडमी नहीं है, जहां खेलने की सुविधा हो। स्कूलों में फीस ले ली जाती है, लेकिन प्रशिक्षण नहीं दिया जाता।

वैशाली शर्मा, बैडमिंटन खिलाड़ी।

अभिभावक दूसरे जिले में प्रशिक्षण के लिए नहीं भेज सकते। अपने जिले में कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में सारे अरमान यही दबकर रह गए।

प्रियंका शर्मा, बैडमिंटन, खिलाड़ी।

उसे टेनिस खेलने का शौक है, लेकिन जिले में कोई सुविधा नही। ऐसे में प्रैक्टिस नहीं हो पा रही। जिससे खेल में पिछड़ना पड़ रहा है।

जूही शर्मा, टेनिस, खिलाड़ी।

खेलों के जरिये भविष्य बनाना चाहती है, लेकिन न तो कालेज स्तर पर व्यवस्था है और स्टेडियम अभी बनकर तैयार नहीं हुआ।

कंचन सिंह, टेनिस, खिलाड़ी।

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अफसर नहीं जानते कितने हैं भिखारीदफ्तरों पर ताले जड़कर भरी हुंकार

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