Move to Jagran APP

सुदामा के पास भगवान का नाम रूपी धन था

नहर पार हनुमान नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के आखिरी दिन कथा वाचक परम पूज्य आचार्य हरी शरण जी ने भगवान श्रीकृष्ण के वैदिक रीति-रिवाज से हुए 16,107 विवाह का वर्णन किया।

By Edited By: Published: Fri, 08 Jun 2012 02:51 PM (IST)Updated: Fri, 08 Jun 2012 02:51 PM (IST)
सुदामा के पास भगवान का नाम रूपी धन था

फरीदाबाद। नहर पार हनुमान नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के आखिरी दिन कथा वाचक परम पूज्य आचार्य हरी शरण जी ने भगवान श्रीकृष्ण के वैदिक रीति-रिवाज से हुए 16,107 विवाह का वर्णन किया। उन्होंने सुदामा की दोस्ती व राजसू यज्ञ का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया।

loksabha election banner

आचार्य हरी शरण जी ने कहा कि सुदामा जी के पास में भगवान का नाम रूपी धन था। संसार के लोग दूसरी दृष्टि से सुदामा को निर्धन मानते हैं, जबकि सुखदेव जी की दृष्टि में सुदामा जी सबसे बड़े धनवान हैं। असली धन प्रभु नाम धन है। इस धन को कमाने के लिए मात्र जिव्हा की जरूरत होती है। कबीरदास जी ने कहा कि कबीरा सब जग निर्धना, धनवंता नहीं कोई, सोई धनवंता जानियो, जापे राम नाम धन हौये। राम रूपी धन जो कमाएगा, वो संसार के समस्त सुख का आनंद उठाएगा। सुदामा जी के जीवन में कृष्ण प्रेम दर्शाया है, जिसमें सुदामा जी कृष्ण से प्रेम करते थे। शुक्रवार की सुबह हवन के बाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर


Jagran.com अब whatsapp चैनल पर भी उपलब्ध है। आज ही फॉलो करें और पाएं महत्वपूर्ण खबरेंWhatsApp चैनल से जुड़ें
This website uses cookies or similar technologies to enhance your browsing experience and provide personalized recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.