विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 23, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मोदी सरकार केवल लोकलुभावन उपायों में विश्वास नहीं करती: अमित शाह

By Rajesh KumarEdited By:
Published: Mon, 23 May 2016 04:30 AM (GMT+05:30)Updated: Mon, 23 May 2016 07:28 AM (GMT+05:30)

भारती जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने कहा मोदी सरकार ने इस बात पर से सस्पेंश को खत्म कर दिया है कि किस क्षेत्र को वरीयता मिलनी चाहिए।

News Article Hero Image

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह का कहना है कि पार्टी ने अपने अच्छे कार्यों की वजह से अब इस बात के ऊपर से सस्पेंस को पूरी तरह के खत्म कर दिया है कि जनता के बीच किसे प्राथमिकता दी जाए। अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने आर्थिक सुधार, सार्वजनिक कल्याण, उद्योग को बढ़ावा देने और कृषि सभी क्षेत्रों पर सामान रूप से काम किया है। यही कारण है कि सरकार ने अपने सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं को लोगों के बीच मोदी सरकार के अच्छे कार्यो को पहुंचाने के लिए कहा गया है।

शाह ने वालेंटियर्स को सायबर योद्दा करार देते हुए कहा कि ये पारंपरिक मीडिया की तरह विवश नहीं है। राज्य सरकार ने चारों संदेह को खत्म कर दिया है जो पिछली व्यवस्था को डुबा कर रख दिया था।

उन्होंने कहा कि पिछली सरकार अक्सर इसी बात में उलझी रहती थी कि आखिर प्राथमिकता किसे दे, वो चाहे बात राजनीतिक हो या अफसरशाही, गांव की हो या शहर की, उद्योग की हो या फिर कृषि की या फिर आर्थिक सुधार की हो या सामाजिक कल्याण की।

ये भी पढ़ें- फेरबदल की खबरों के बीच पीएम मोदी और अमित शाह ने की बैठक

शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने इन चारों के ऊपर से सस्पेंस को खत्म कर दिया है। क्योंकि इन्हीं के चलते पिछली सरकार और देश का भविष्य दोनों का नुकसान हुआ। 26 मई को मोदी सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भाजपा की तरफ से इसे व्यापक तौर पर प्रचार करने की योजना है।

अमित शाह ने पिछली यूपीए सरकार पर भ्रष्टाचार में डूबे रहने का आरोप लगाते हुए कहा गया कि इसके चलते 12 लाख करोड़ रूपये का भ्रष्टाचार हुआ। उन्हने कहा कि दुनिया में ऐसी कोई सरकार नहीं जब इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ हो।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा- “सरकार सुधार चाहती है और इसकी प्राथमिकता कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है। कृषि से लेकर उद्योग तक सभी को बराबार ध्यान देकर बेहतर संतुलन लाने की कोशिश की गई जो कि एक नई शुरूआत है। सरकार केवल कागजों पर लोकलुभावन घोषणाओं में विश्वास नहीं करती है।”