के बालाचंदर को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

Publish Date:Friday,Apr 29,2011 06:29:26 PM | Updated Date:Friday,Nov 18,2011 01:13:52 PM
के बालाचंदर को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए वर्ष 2010 का प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार वरिष्ठ फिल्मकार के बालाचंदर [81] को दिया जाएगा। सुपर हिट हिंदी फिल्म 'एक दूजे के लिए' के निर्देशक बालाचंदर को इस पुरस्कार के रूप में स्वर्ण कमल और दस लाख रुपये नकद दिए जाएंगे।

वह तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी में सौ से अधिक फिल्में बना चुके हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने जाने माने लोगों की समिति की अनुशंसा के बाद इस पुरस्कार के लिए उनके नाम की घोषणा की। 1970 के दशक में तमिल फिल्म निर्माण और निर्देशन को नया अंदाज देने वाले बालाचंदर पिछले 45 साल से अधिक समय से फिल्म निर्देशक, निर्माता और पट कथा लेखक के तौर पर सक्रिय हैं। उन्हें रजनीकांत, कमल हासन, प्रकाशराज और विवेक जैसे वर्तमान दौर के कई सितारों को फिल्मी दुनिया में लाने का श्रेय है। उन्हें 1987 में पद्मश्री और 1973 में तमिलनाडु सरकार ने 'कलाईममानी' की उपाधि से सम्मानित किया था।

बालाचंदर ने 1965 मंें फिल्म उद्योग में कदम रखा था और 'नीरकुमिझी' उनकी पहली फिल्म थी। उनकी निर्देशित प्रमुख फिल्मों में 'अपूर्वा रागगल', 'अवर्गल', '47 नाटकल', एक दूजे के लिए और 'बेकियाली अरलिदा होवु' [कन्नड़] प्रमुख हैं। तमिलनाडु के तंजावुर जिले में जुलाई 1930 में जन्में बालाचंदर पहले सरकारी नौकरी में थे। बाद में नाटक लेखक के तौर पर अपना करियर शुरू किया था। पिछले कुछ साल से बालाचंदर ने छोटे पर्दे का रुख कर लिया है।

महत्वपूर्ण फिल्में:-

तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी में बना चुके हैं सौ से अधिक फिल्में

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