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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 29, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

लुका-छिपी का खेल बहुत हुआ, सहारा को देना होगा निवेशकों का पैसा

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Published: Tue, 29 Oct 2013 09:25 AM (IST)Updated: Mon, 30 Mar 2015 06:40 PM (IST)

निवेशकों को 20 हजार करोड़ रुपये लौटाने में देरी के कारण सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के खिलाफ नाराजगी जताई ...और पढ़ें

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। निवेशकों को 20 हजार करोड़ रुपये लौटाने में देरी के कारण सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के खिलाफ नाराजगी जताई है। अदालत ने सोमवार को सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, 'लुका-छिपी का खेल बहुत हुआ, वह अब निवेशकों का पैसा देने से नहीं बच पाएगा।'

पढ़ें : सहारा सेबी को सौंपे संपत्ति के दस्तावेज

जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जेएस खेहर की पीठ ने सेबी की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। कोर्ट ने सहारा को संपत्ति के मालिकाना हक के मूल दस्तावेज उनकी मूल्यांकन रिपोर्ट के साथ सेबी के पास जमा कराने का आदेश दिया। सेबी सहारा की ओर से जमा कराए गए दस्तावेजों व मूल्यांकन रिपोर्ट की जांच करेगा। इस मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर को होगी।

सहारा की दलील : सुब्रत राय 24,000 करोड़ के देनदार नहीं

समूह की दो कंपनियों- सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉर्प और सहारा सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्प ने 2008-09 में बांड जारी कर आम लोगों से धन जुटाया था। इसे लेकर पूंजी बाजार नियामक सेबी ने आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल 31 अगस्त को सहारा समूह को निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपये 30 नवंबर तक वापस करने का आदेश दिया था। सहारा समूह की दलील सहारा के वकील सी सुंदरम ने संपत्तियों के मालिकाना हक के मूल दस्तावेज जमा कराने का विरोध करते हुए कहा था कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) कंपनी की जमीन की सिक्योरिटी ट्रस्टी बनने को राजी है। पहले सहारा की ओर से जमा कराए गए दस्तावेजों की जांच की जाए। इसके अलावा कंपनी की ओर से जमा कराए गए 5,120 करोड़ रुपये का आकलन किया जाए। अगर फिर भी पैसा कम पड़े तो पंजाब नेशनल बैंक की ओर से दी गई सिक्योरिटी को बेचकर बकाया पैसा ले लिया जाए।

कंपनी की ओर से जमा कराए गए दस्तावेजों की जांच से पहले ही संपत्तियों के मालिकाना हक के कागजात लेने से रीयल एस्टेट के बिजनेस में लगी कंपनी को अपूरणीय क्षति होगी। लेकिन सहारा के इस सुझाव पर सेबी के वकील राजी नहीं हुए।

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