यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 29, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आधे एलपीजी ग्राहकों को सीधे मिलेगी नकद सब्सिडी
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। आम चुनाव की तैयारी में जुटी संप्रग सरकार ने अपना एक और दांव खेल दिया है। ...और पढ़ें

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। आम चुनाव की तैयारी में जुटी संप्रग सरकार ने अपना एक और दांव खेल दिया है। जनता को सीधे बैंक खाते में सरकारी सब्सिडी देने की योजना को व्यापक विस्तार दिया गया है। अगले चार माह के भीतर 269 और जिलों के एलपीजी ग्राहकों के बैंक खाते में नकदी ट्रांसफर करने की कैश बेनिफिट ट्रांसफर [सीबीटी] योजना लागू की जाएगी। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति [सीसीईए] की गुरुवार को हुई बैठक में यह फैसला किया गया। इस कदम से देश की लगभग आधी आबादी तक सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना की पहुंच बन जाएगी।
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सीसीईए के फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बताया कि एलपीजी सब्सिडी नकदी सीधे बैंक खाते में देने की योजना अभी प्रायोगिक तौर पर 20 जिलों में चलाई जा रही है। इसे अब 269 और जिलों में लागू किया जाएगा। पहली सितंबर, 2013 से 34 जिलों, एक अक्टूबर से 44, पहली नवंबर से 46, पहली दिसंबर से 40 और पहली जनवरी, 2014 से 105 जिलों में एलपीजी ग्राहकों के बैंक खाते में सीधे सब्सिडी जानी शुरू हो जाएगी। इस तरह से आगामी चुनाव से पहले कम से कम 289 जिलों में एलपीजी सब्सिडी ग्राहकों के बैंक खातों में पहुंचने लगेगी। देश में 15 करोड़ एलपीजी ग्राहक हैं। वहीं, 289 जिलों में एलपीजी ग्राहकों की संख्या साढ़े सात करोड़ के करीब है।
संकेत हैं कि अगर अगले तीन से चार महीनों में शेष बचे जिलों में भी आधार कार्ड बनवाने और इस कार्ड को बैंक खाते से जोड़ने का काम सही तरीके से चला तो उक्त के अतिरिक्त भी 125 और जिलों में इस स्कीम को पहुंचाया जा सकेगा। वैसे अगर 289 जिलों में भी यह स्कीम लागू कर दी गई तो देश की लगभग आधे एलपीजी ग्राहकों को नकद सब्सिडी मिलने लगेगी। अभी जिन 20 जिलों में यह स्कीम लागू हुई है, वहां 72.28 लाख से ज्यादा ग्राहकों के बैंक खाते में हर महीने एलपीजी सब्सिडी पहुंच रही है।
इस कैश बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम को संप्रग सरकार अपनी एक बड़ी उपलब्धि मान रही है। सीधे जनता के बैंक खाते में नकदी डालने की इस योजना को गेम चेंजर के तौर पर भी प्रचारित किया जा रहा है। इस योजना के लिए ग्राहकों का आधार कार्ड होना और कार्ड नंबर का बैंक खाते के साथ जोड़ना जरूरी है। अधिकांश जिलों में यह काम काफी सुस्त तरीके से हो रहा है, लेकिन चुनावी तैयारियों में जुटी सरकार अब इसे ज्यादा से ज्यादा विस्तार देने में जुट गई है।
