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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 20, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

शाखा से ग्राहकों को दूर रखने के लिए बैंकों ने निकाली नई तरकीब

By Anand RajEdited By:
Published: Mon, 20 Oct 2014 09:52 AM (IST)Updated: Mon, 20 Oct 2014 09:59 AM (IST)

आपका बैंक चाहता है कि आप बैंक की शाखा में कम से कम जाएं। इसके लिए उन्होंने ब्रांच विजिट पर ...और पढ़ें

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नई दिल्ली (जागरण ब्यूरो)। आपका बैंक चाहता है कि आप बैंक की शाखा में कम से कम जाएं। इसके लिए उन्होंने ब्रांच विजिट पर शुल्क लगाया, पर आधी अधूरी सफलता मिली। युवा ग्राहकों को शाखा से दूर रखने के लिए सोशल मीडिया के जरिये बैंकिंग सेवा शुरू की गई। यह पॉपुलर भी हुई पर सोशल मीडिया से परहेज करने वाले ग्राहक इससे दूर ही रहे। इसे देखते हुए इंडसइंड बैंक ने वर्चुअल ब्रांच ही खोल डाली है।

वर्चुअल ब्रांच एक ऐसी ब्रांच है, जिसके जरिये आप बैंक शाखा में गए बिना ही बैंकिंग के सारे कार्य संपन्न कर सकते हैं। इंडसइंड बैंक इसके केयोस्क भी लगाने वाला है ताकि इंटरनेट का खर्च किए बिना आप बैकिंग संपन्न कर सकें। बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि रीयल एस्टेट की बढ़ती कीमत और सिकुड़ते मार्जिन को देखते हुए बैंक की शाखा व ग्राहक के बीच एक तकनीकी इंटरफेस बनाना जरूरी है। यदि बैंक के दस फीसद ग्राहक भी किसी दिन एक साथ ब्रांच में पहुंच जाएं तो पूरी व्यवस्था चरमरा जाएगी। इंडसइंड ने अपनी हर ब्रांच को होम ब्रांच घोषित कर दिया है ताकि जो ग्राहक जहां है, वहां की निकटतम शाखा से हर किस्म के बैंकिंग कार्य को संपन्न कर सके।

आइसीआइसीआइ देश का पहला बैंक था जिसने ग्राहकों की ब्रांच विजिट की संख्या सीमित कर दी थी और उसके बाद ब्रांच आने वालों पर पेनाल्टी लगा दी थी। पर आई-विश के जरिये फेसबुक बैंकिंग लांच करके बैंक अपने युवा ग्राहकों को शाखा से दूर रखने में बहुत हद तक कामयाब रहा। इससे उत्साहित होकर बैंक ने पॉकेट नामक फेसबुक बैंकिंग एप भी लांच किया। इसके जरिये मनी ट्रांसफर और मोबाइल रिचार्ज के अलावा मूवी टिकट भी बुक किए जा सकते हैं। इस एप को लांच करते हुए बैंक की एमडी चंदा कोचर ने कहा था कि बैंक के करीब एक तिहाई ग्राहक 30 वर्ष से कम आयु के हैं। यह आयु वर्ग फेसबुक पर बहुत अधिक समय व्यतीत करता है। अब बैंकिंग के लिए उन्हें सोशल साइट छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। तात्पर्य यह कि अगर ग्राहक की आवश्यकता फेसबुक पर ही पूरी हो जाती है तो वह ब्रांच क्यों जाएगा। अब आइसीआइसीआइ ट्विटर के जरिये बैंकिंग सेवा देने पर विचार कर रहा है।

सोशल मीडिया स्पेस में अपनी पैठ बनाने और ग्राहकों को शाखा से दूर रखने की मंशा से कोटक म¨हद्रा बैंक ने हाल ही में के-पे नाम से फेसबुक बैंकिंग की शुरुआत की है। कोटक की इस सेवा के जरिये इंटरनेट बैंकिंग व डेबिट कार्ड के बिना भी फेसबुक यूजर अपने दोस्तों को मनी ट्रांसफर कर सकते हैं। बैंक इससे पूर्व जाइफाइ बैंकिंग एकाउंट हैंडल के जरिये ट्विटर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराता रहा है। एक बात तो साफ है कि बैंक यदि आपको इंटरनेट बैंकिंग, सोशल मीडिया और डोरस्टेप बैंकिंग के जरिये अपनी सेवाएं देना चाहते हैं तो इसमें आपकी सुविधा के अलावा उसका स्वार्थ भी छुपा है। ब्रांच की संख्या बढ़ाए बिना वह अपना कारोबार बढ़ा सकते हैं, बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।

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