यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 29, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बैंक ग्राहकों को मिलेंगी और सुविधाएं
बैंकों की तरफ से ग्राहकों को मिलने वाली सुविधाओं को विस्तार देते हुए रिजर्व बैंक ने कई नए कदम उठाने ...और पढ़ें

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। बैंकों की तरफ से ग्राहकों को मिलने वाली सुविधाओं को विस्तार देते हुए रिजर्व बैंक ने कई नए कदम उठाने का एलान किया है। केंद्रीय बैंक ने उन गांवों में भी बैंकिंग सुविधाएं बढ़ाने का फैसला किया है जहां अभी बैंकों की शाखाएं नहीं हैं। साथ ही आरबीआइ ने ऑनलाइन बैंकिंग व कार्ड के जरिये होने वाले भुगतान को और सुरक्षित बनाने के कदम भी उठाए हैं।
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मौद्रिक नीति की समीक्षा में गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि ऐसे चार लाख 90 हजार गांवों की पहचान की गई है, जहां 2016 तक बैंकों को अपनी सेवाएं पहुंचानी हैं। दो हजार से भी कम की आबादी वाले इन गांवों को अलग-अलग बैंकों के बीच बांटा गया है। इसके अलावा जिन लोगों के पास बैंक खाते नहीं हैं, उन्हें प्रीपेड पेमेंट व्यवस्था के जरिये कार्ड सुविधा देने का एक पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया है। वैसे, राजन ने ग्राहक सुविधाएं बढ़ाने पर पहले बनी दामोदरन समिति की रिपोर्ट का जिक्र अपनी समीक्षा में नहीं किया।
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मोबाइल बैंकिंग पर समिति
रिजर्व बैंक एसएमएस पर आधारित फंड ट्रांसफर व्यवस्था शुरू करना चाहता है। इसके विकल्पों और उपाय तलाशने के लिए आरबीआइ ने एक तकनीकी समिति का गठन किया है। यह समिति देश में मोबाइल बैंकिंग के विस्तार कार्यक्रम के तहत हर तरह के हैंडसेट में फंड ट्रांसफर की सहूलियत की संभावना तलाशेगी। समिति दिसंबर 2013 तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।
बिल पेमेंट सिस्टम
बैंक ग्राहकों को बीमा प्रीमियम, बिजली व पानी के बिल, टैक्स, यूनिवर्सिटी फीस वगैरह के भुगतान के लिए उपयुक्त इलेक्ट्रॉनिक बिल पेमेंट सिस्टम की संभावना भी बैंक तलाश रहा है। इसके लिए सभी बैंकों के प्रतिनिधित्व वाला एक समूह भी गठित किया गया है। समूह इस साल के अंत तक अपनी रिपोर्ट दे देगा।
क्रेडिट कार्ड जोखिम
क्रेडिट कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग में ग्राहकों से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए भी केंद्रीय बैंक निरंतर प्रयास कर रहा है। इसके लिए आरबीआइ ने सभी बैंकों को जून, 2013 तक सुरक्षित व्यवस्था कायम करने को कहा था। इस व्यवस्था की समीक्षा में रिजर्व बैंक को कुछ तकनीकी गड़बड़ियां मिली हैं। इन्हें दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
