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उस दिन से श्री गणेश चतुर्थी का व्रत मनोकामना पूरी करने वाला व्रत माना जाता है

Publish Date:Wed, 01 Mar 2017 11:04 AM (IST) | Updated Date:Tue, 14 Mar 2017 09:55 AM (IST)
उस दिन से श्री गणेश चतुर्थी का व्रत मनोकामना पूरी करने वाला व्रत माना जाता हैउस दिन से श्री गणेश चतुर्थी का व्रत मनोकामना पूरी करने वाला व्रत माना जाता है
इस व्रत को करने की विधि भी श्री गणेश के अन्य व्रतों के समान ही सरल है. गणेश चतुर्थी व्रत प्रत्येक मास में कृ्ष्णपक्ष की चतुर्थी में किया जाता है ।

श्री गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन हुआ था इसलिये इनके जन्म दिवस को व्रत कर श्री गणेश जन्मोत्सव के रुप में मनाया जाता है। जिस वर्ष में यह व्रत रविवार और मंगलवार के दिन का होता है उस वर्ष में इस व्रत को महाचतुर्थी व्रत कहा जाता है। 
इस व्रत को करने की विधि भी श्री गणेश के अन्य व्रतों के समान ही सरल है. गणेश चतुर्थी व्रत प्रत्येक मास में कृ्ष्णपक्ष की चतुर्थी में किया जाता है पर इस व्रत की यह विशेषता है, कि यह व्रत सिद्धि विनायक श्री गणेश के जन्म दिवस के दिन किया जाता है।  सभी 12 चतुर्थियों में माघ, श्रावण, भाद्रपद और मार्गशीर्ष माह में पडने वाली गणेश चतुर्थी का व्रत करन विशेष कल्याणकारी रहता है। व्रत के दिन उपवासक को प्रात:काल में जल्द उठना चाहिए।  सूर्योदय से पूर्व उठकर, स्नान और अन्य नित्यकर्म कर, सारे घर को गंगाजल से शुद्ध कर लेना चाहिए।  स्नान करने के लिये भी अगर सफेद तिलों के घोल को जल में मिलाकर स्नान किया जाता है। तो शुभ रहता है।  प्रात: श्री गणेश की पूजा करने के बाद, दोपहर में गणेश के बीजमंत्र
ऊँ गं गणपतये नम: का जाप करना चाहिए। 
इसके पश्चात भगवान श्री गणेश  धूप, दूर्वा, दीप, पुष्प, नैवेद्ध व जल आदि से पूजन करना चाहिए।  और भगवान श्री गणेश को लाल वस्त्र धारण कराने चाहिए।  अगर यह संभव न हों, तो लाल वस्त्र का दान करना चाहिए।  
श्री गणेश चतुर्थी व्रत कथा
श्री गणेश चतुर्थी व्रत को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलन में है कथा के अनुसार एक बार भगवान शंकर और माता पार्वती नर्मदा नदी के निकट बैठे थें वहां देवी पार्वती ने भगवान भोलेनाथ से समय व्यतीत करने के लिये चौपड खेलने को कहाभगवान शंकर चौपड खेलने के लिये तो तैयार हो गये परन्तु इस खेल मे हार-जीत का फैसला कौन करेगा?
इसका प्रश्न उठा, इसके जवाब में भगवान भोलेनाथ ने कुछ तिनके एकत्रित कर उसका पुतला बना उस पुतले की प्राण प्रतिष्ठा कर दीऔर पुतले से कहा कि बेटा हम चौपड खेलना चाहते है परन्तु हमारी हार-जीत का फैसला करने वाला कोई नहीं है इसलिये तुम बताना की हम मे से कौन हारा और कौन जीता
यह कहने के बाद चौपड का खेल शुरु हो गया खेल तीन बार खेला गया, और संयोग से तीनों बार पार्वती जी जीत गईखेल के समाप्त होने पर बालक से हार-जीत का फैसला करने के लिये कहा गया, तो बालक ने महादेव को विजयी बताया यह सुनकर माता पार्वती क्रोधित हो गईऔर उन्होंने क्रोध में आकर बालक को लंगडा होने व किचड में पडे रहने का श्राप दे दियाबालक ने माता से माफी मांगी और कहा की मुझसे अज्ञानता वश ऎसा हुआ, मैनें किसी द्वेष में ऎसा नहीं किया बालक के क्षमा मांगने पर माता ने कहा की, यहां गणेश पूजन के लिये नाग कन्याएं आयेंगी, उनके कहे अनुसार तुम गणेश व्रत करो, ऎसा करने से तुम मुझे प्राप्त करोगें, यह कहकर माता, भगवान शिव के साथ कैलाश पर्वत पर चली गई
एक वर्ष बाद उस स्थान पर नाग कन्याएं आईंनाग कन्याओं से श्री गणेश के व्रत की विधि मालुम करने पर उस बालक ने 21 दिन लगातार गणेश जी का व्रत किया। गणेश जी प्रसन्न हो गए और श्री गणेश ने बालक को मनोवांछित फल मांगने के लिये कहा बालक ने कहा की है विनायक मुझमें इतनी शक्ति दीजिए, कि मैं अपने पैरों से चलकर अपने माता-पिता के साथ कैलाश पर्वत पर पहुंच सकूं और वो यह देख प्रसन्न हों। बालक को यह वरदान दे, श्री गणेश अन्तर्धान हो गए बालक इसके बाद कैलाश पर्वत पर पहुंच गया और अपने कैलाश पर्वत पर पहुंचने की कथा उसने भगवान महादेव को सुनाई उस दिन से पार्वती जी शिवजी से विमुख हो गई। देवी के रुष्ठ होने पर भगवान शंकर ने भी बालक के बताये अनुसार श्री गणेश का व्रत 21 दिनों तक किया इसके प्रभाव से माता के मन से भगवान भोलेनाथ के लिये जो नाराजगी थी वह समाप्त हो गई
यह व्रत विधि भगवन शंकर ने माता पार्वती को बताई यह सुन माता पार्वती के मन में भी अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने की इच्छा जाग्रत हुई माता ने भी 21 दिन तक श्री गणेश व्रत किया और दुर्वा, पुष्प और लड्डूओं से श्री गणेश जी का पूजन किया। व्रत के 21 वें दिन कार्तिकेय स्वयं पार्वती जी से आ मिलें उस दिन से श्री गणेश चतुर्थी का व्रत मनोकामना पूरी करने वाला व्रत माना जाता है
पूजा में घी से बने 21 लड्डूओं से पूजा करनी चाहिए।  इसमें से दस अपने पास रख कर, शेष सामग्री और गणेश मूर्ति किसी ब्राह्मण को दान-दक्षिणा सहित दान कर देनी चाहिए। 

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Web Title:Ganesh Chaturthi is fast Karan particular welfare(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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