यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 14, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आस्ट्रेलियाई टीम को हल्के में लेना धौनी को पड़ा भारी
कंगारुओं को हल्के में लेना भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी को काफी भारी पड़ा और जॉर्ज बेली की अगुआई में ...और पढ़ें

विशेष संवाददाता, जयपुर । कंगारुओं को हल्के में लेना भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी को काफी भारी पड़ा और जॉर्ज बेली की अगुआई में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने भारत को पहले वनडे में करारी शिकस्त दी।
पहले वनडे से पूर्व शनिवार को हुई प्रेस कांफ्रेंस में धौनी ने कहा था कि हम ऑस्ट्रेलिया को हल्के में नहीं लेंगे, लेकिन उन्होंने मेहमानों को कमजोर समझा और अपनी जिद में टीम को हार की धकेला। अगर भारतीय कप्तान ने बाकी मैचों में भी ऐसा ही किया तो भारत का सीरीज में हार से बचना मुश्किल होगा। धौनी का चैंपियंस लीग से लगातार खराब प्रदर्शन कर रहे स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और राजकोट में हुए टी-20 मैच में सबसे ज्यादा रन खर्च करने वाले इशांत शर्मा को पहले वनडे मैच की एकादश में शामिल करने का फैसला भारी पड़ा।
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इशांत की गेंदें सही स्पॉट पर नहीं पड़ रहीं हैं, जबकि अश्विन गेंद को स्पिन कराने में असफल हो रहे हैं। टी-20 मैच में चार ओवर के स्पैल में 52 रन देने वाले इशांत ने पहले वनडे में आठ की औसत से 56 रन खर्च लुटाए। हालत यह थी कि मुख्य गेंदबाज होने के बावजूद वह अपना दस ओवर का स्पैल भी पूरा नहीं कर सके। दूसरी ओर, इसी पिच पर मेहमान टीम के तेज गेंदबाजों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। इस मैच के बाद भी धौनी, इशांत और अश्विन को टीम में शामिल करने को गलती मानने से इन्कार कर रहे हैं।
धौनी को यह याद रखना होगा कि ऑस्ट्रेलिया ने हाल में वनडे मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया है और यहां रिकॉर्ड भी उनके पक्ष में है। ऑस्ट्रेलिया ने भारत में अभी तक जितनी द्विपक्षीय वनडे सीरीज खेली हैं उसमें भारत को सिर्फ दो में ही जीत मिली है, जबकि मेहमान टीम ने चार सीरीज अपने नाम की हैं। इन सबको देखते हुए धौनी को अपनी जिद छोड़कर अगले मैच के लिए दिमाग से टीम का चयन करना चाहिए।
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