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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 24, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

NPPA को संदेह 634 दवाओं की कीमत तय दाम से कहीं ज्यादा, कई बड़ी कंपनियों पर नियमों के उल्लंघन का शक

By Praveen DwivediEdited By:
Published: Fri, 24 Feb 2017 05:22 PM (IST)Updated: Fri, 24 Feb 2017 05:23 PM (IST)

एनपीपीए को विभिन्न कंपनियों की 634 दवाओं के दाम में अधिक रखे जाने का संदेह है।

NPPA को संदेह 634 दवाओं की कीमत तय दाम से कहीं ज्यादा, कई बड़ी कंपनियों पर नियमों के उल्लंघन का शक
NPPA को संदेह 634 दवाओं की कीमत तय दाम से कहीं ज्यादा, कई बड़ी कंपनियों पर नियमों के उल्लंघन का शक

नई दिल्ली: राष्ट्रीय दवा मूल्य प्राधिकरण (एनपीपीए) को विभिन्न कंपनियों की 634 दवाओं के दाम में अधिक रखे जाने का संदेह है। प्राधिकरण के मुताबिक विभिन्न कंपनियों की इन दवाओं में उसके द्वारा अधिसूचित अधिकतम मूल्य का अनुपालन नहीं किया गया है।

क्या कहती है एनपीपीए की ताजा अधिसूचना:

एनपीपीए ने अपनी हालिया अधिसूचना में कहा है कि उसने यह सूची पिछले साल दिसंबर में विभिन्न दवाओं के बाजार आंकड़ों के विश्लेषण के बाद जारी की है। इस सूची में सिप्ला, अबॉट इंडिया, अजंता फार्मा, अल्केम लैब, एस्ट्राजेनेका, डॉ रेड्डीज लैब और कैडिला सहित कई दवा निर्माता कंपनियां शामिल हैं। एनपीपीए ने अब तक 662 दवाओं के अधिकतम मूल्य अधिसूचित किए हैं। ये दाम डीपीसीओ-2013 आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम-15) के तहत तय किए गए हैं।

आपको बता दें कि सरकार किसी खास चिकित्सा वर्ग की सभी दवाओं के सामान्य औसत मूल्य के हिसाब से आवश्यक दवाओं का दाम तय करती है। इसमें सिर्फ वहीं दवाएं शामिल की जातीं हैं जिनकी बाजार हिस्सेदारी एक फीसद से अधिक होती है। कंपनियों को इस तरह की दवाओं के दाम एक साल में 10 फीसद तक बढ़ाने की अनुमति है। सरकार ने दवा मूल्य नियंत्रण आदेश-2013 (डीपीसीओ) को 15 मई 2014 से अधिसूचित किया है। यह आदेश 1995 के आदेश के स्थान पर लाया गया जिसमें कि केवल 74 थोक दवाओं के दाम का ही नियमन किया जाता था। आवश्यक दवाओं के दाम तय करने और उसमें संशोधन के लिए एनपीपीए की स्थापना 1997 में की गई।