जान जोखिम में डाल इलाज कराने आते हैं मरीज

Publish Date:Tue, 18 Jul 2017 03:06 AM (IST) | Updated Date:Tue, 18 Jul 2017 03:06 AM (IST)
जान जोखिम में डाल इलाज कराने आते हैं मरीजजान जोखिम में डाल इलाज कराने आते हैं मरीज
अगर आप गर्दनीबाग अस्पताल में इलाज के लिए जा रहे हैं, तो सावधानी ज्यादा बरतनी होगी।

अगर आप गर्दनीबाग अस्पताल में इलाज के लिए जा रहे हैं, तो सावधानी ज्यादा बरतनी होगी। यहां डॉक्टर तक पहुंचने से पहले आपको बिजली के झटकों से खुद को बचाना होगा। अस्पताल की गैलरी में खुले में बिजली के तार लटके हैं। शॉर्ट-सर्किट के कारण पंखे, कूलर तक जल चुके हैं। इन सबके बावजूद यहां न तो अग्निशमन उपकरण मौजूद है और न ही कोई अन्य मुकम्मल इंतजाम। अस्पताल प्रशासन पत्र लिखकर अपनी जवाबदेही पूरी कर रहा है, तो बिजली विभाग के अधिकारी हादसा होने का इंतजार कर रहे। 'ऑन द स्पॉट' में पढि़ए गर्दनीबाग अस्पताल का हाल।

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गर्दनीबाग अस्पताल के मुख्य गेट से थोड़ी दूर आगे बढ़ने पर ही जमीन पर ही केबल पड़ा है, जिसमें बिजली दौड़ रही है। अस्पताल प्रशासन ने हाथ से खतरा लिखा बोर्ड लगा दिया है। तार के आसपास के इलाके को घेरा भी नहीं गया है। गैलरी में प्रवेश करते ही मोड़ पर जर्जर बिजली बोर्ड है। वर्षो से बोर्ड क्षतिग्रस्त है। यहीं से अस्पताल के हर वार्ड को बिजली कनेक्शन दिया गया है। बोर्ड में कई बार शार्ट सर्किट हुआ। ओटी के उपकरण जल गए। पंखा से लेकर एसी तक जल गया। बिजली बोर्ड भी नीचे है। अस्पताल के उपाधीक्षक, डॉक्टर, स्टाफ सहित मरीज इसी रास्ते से गुजरते हैं। अस्पताल प्रशासन खुद भी मानता है कि किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है। अस्पताल की उपाधीक्षक कहा कहना है कि कई माह से बिजली विभाग को बिजली बोर्ड सही करने और केबल मरम्मत के लिए पत्र लिखा गया है, मगर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। पत्र से फाइल मोटी हो गई है, पर बिजली विभाग को मरीजों की सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं है।

अस्पताल में मरीजों के लिए सुविधा ढूंढ़ना बेमारी लगता है। इतनी भीषण गर्मी में भी पंखा खराब है। प्यास लगी तो पानी बाहर दुकान से खरीदकर पीना होगा। वाटर कूलर खराब है। डॉक्टर समय से आते हैं, मगर कुछ दवाएं ही मिलती हैं। अल्ट्रासाउंड जांच दो साल से बंद है। ऐसा लगता है, जैसे जो चीज खराब हो गई वो दोबारा बनेगी ही नहीं।

10:30 बजे : शॉर्ट-सर्किट से पंखा भी खराब

पर्ची काउंटर पर मरीजों की लंबी कतार लगी है। एक-एक कर मरीज पर्चा लेकर संबंधित डॉक्टर के केबिन में आ-जा रहे हैं। हर गुजरने वाला शख्स गलियारे में बने इलेक्ट्रिक पैनल से बचकर निकल रहा है। कई जगह केबल कटा है तो कई जगह तारों का मकड़जाल है। बीच-बीच में चिंगारी भी निकल रही है। बीमार और परिजन इन सबसे बचते-बचाते डॉक्टर के केबिन तक पहुंच रहे हैं। ओपीडी में दो दर्जन मरीज कुर्सी पर बैठे हैं। एक पंखा है, लेकिन वह भी शार्ट-सर्किट से खराब है। गर्मी से बेहाल मरीज पसीने से तर बतर है। पीने को पानी तक नहीं मिलने वाला। क्योंकि, वाटर कूलर कई दिनों से बंद है और बगल में शौचालय के गेट पर ताला लटक रहा है।

11:00 बजे : मरीज बाहर, एमआर अंदर

ओपीडी 1 ए और 1 बी में मरीज बाहर बैठे हैं और अंदर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की भीड़ जुटी है। इसी बीच दो तीमारदार पानी की बोतल लेकर बाहर से आए। पूछने पर बताया कि यहां पानी के लिए वाटर कूलर तो लगा है, पर खराब है। आगे चेस्ट क्लीनिक सह डॉट सेंटर में तीन कर्मचारियों की कुर्सी खाली है। एक कर्मचारी कुर्सी पर ही सो रहा है।

11:20 बजे : अल्ट्रासाउंड दो साल से बंद

अल्ट्रासाउंड कक्ष बंद है। अंदर तीन-चार महिलाएं आपस में बातचीत कर रही हैं। एक महिला स्टाफ फाइल पलट रही है। पूछने पर पता चला कि अल्ट्रासाउंड पिछले दो साल से बंद है। अल्ट्रासाउंड जांच के लिए मरीजों को बाहर की पर्ची थमा दी जाती है।

11:30 बजे : नहीं मिलती हैं ज्यादातर दवाएं

दवा काउंटर पर भी मरीजों की लंबी कतार लगी है। सभी के हाथ में पर्ची और उसमें करीब एक ही तरह की दवा लिखी गई थी जबकि दवा काउंटर पर दवाओं की लंबी लिस्ट लगी है। हैरानी की बात दवाओं की लिस्ट तो लंबी है, पर इसमें सत्तर फीसद दवा अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं है। सर्दी, जुकाम, बुखार और डायरिया जैसे बीमारी की दवा तो अस्पताल में मिल रही थी, लेकिन गंभीर बीमारी के उपचार के नाम पर चिकित्सक सिर्फ सलाह दे रहे थे।

आग लगी तो हो सकता है बड़ा हादसा

कुछ दिन पहले लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रामा सेंटर में शार्ट सर्किट से आग लग थी इसमें एक दर्जन मरीज जिंदा जल गए। इसके घटना से भी अस्पताल प्रशासन सीख नहीं ले रहा। अगर गर्दनीबाग अस्पताल में शार्ट सर्किट से कोई हादसा होता है तो बचाव के लिए एक अग्निशमन यंत्र तक का इंतजाम नहीं है। हैरानी की बात तो यह है कि कुछ दिन पूर्व ही गर्दनीबाग अस्पताल के बिजली बोर्ड में आग भी लगी थी।

कूड़ा डंपिंग यार्ड और धरना स्थल मुसीबत

अस्पताल के मुख्य गेट से चंद कदम की दूरी पर ही कूड़ा डंपिंग यार्ड बना है। दुर्गध का असर अस्पताल के ओपीडी से लेकर वार्ड तक है। अस्पताल में आने वाले डॉक्टर-मरीज सभी दुर्गध से परेशान हैं। पास में ही धरना स्थल बन जाने से अधिकांश प्रदर्शनकारी प्रतीक्षालय में मरीजों के लिए बने सीट पर कब्जा जमाए रहते हैं।

बयान :

अस्पताल में बिजली की खपत बढ़ती रही है, जबकि केबल से लेकर बोर्ड तक पुराना है। ओपीडी की गैलरी तक जाने में बिजली बोर्ड बड़ा खतरा है। हर दिन शार्ट सर्किट की स्थिति रहती है। बिजली विभाग को दूसरे स्थान पर बोर्ड सेट करने के लिए आठ से दस बार पत्र लिखा गया। अग्निशमन यंत्र लगवाने के लिए भी उच्चाधिकारियों से बातचीत हुई। आज फिर बिजली विभाग से संपर्क किया जाएगा।

डॉ. मंजुला रानी, उपाधीक्षक, गर्दनीबाग अस्पताल

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Web Title:Patients come to treat people at risk(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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