पटना, जागरण संवाददाता। Patna News: पटना के एक मुहल्‍ले में रविवार की सुबह से किसी भी घर में चूल्‍हा नहीं जला। भीषण गर्मी में बच्‍चे भूख से तड़प रहे हैं। दूसरी तरफ, मुहल्‍ले के लोग अपने एलपीजी सिलेंडरों को बाहर निकालकर उनमें आग लगा रहे हैं। ये परिवार अपना आश‍ियाना बचाने के लिए चीख और रो रहे हैं। हंगामा कर रहे हैं और प्रशासन पर पत्‍थर चला रहे हैं। यह पूरा मामला जब आप जानेंगे, तो समझेंगे कि सिस्‍टम की नाकामी किस तरह हालात को पेचीदा बना देती है। आम आदमी की जिंदगी को नर्क बना देती है। 

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पटना के दीघा- राजीवनगर में प्रशासन राज्‍य आवास बोर्ड की जमीन पर बने मकानों को तोड़ रहा है। यह जमीन करीब 50 साल से विवादित है। यहां घर बनाकर रह रहे लोगों का अपना दावा है। पिछले 20 से 30 साल में यहां सैकड़ों मकान बन गए हैं। इनमें जज और अफसरों के घर भी शामिल हैं। रविवार की सुबह प्रशासन ने नेपालीनगर में पहले से नोटिस पाने वाले करीब 70 घरों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की।

प्रशासन की कार्रवाई से नेपाली नगर का हर घर दहशत में है। आक्रोशित लोगों ने आज अपने घरों का चूल्हा नहीं जलाया। पड़ोसियों के घरों को टूटते देख किसी को भूख भी नहीं लगी। नेपाली नगर निवासी जगनंदन शर्मा का कहना है कि किसी का बना बनाया मकान टूट रहा है, ऐसे में भूख कब गायब हो गई पता ही नहीं चला। सुबह से लोग अपने टूटते  मकानों को देख रहे हैं। जिन छतों पर बच्चे चहल कदमी करते थे, वह छत पर धराशाई हो गई । ऐसे में आक्रोश के सिवा कुछ नहीं दिखाई पड़ रहा है।

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लोगों का कहना है कि बिना मुआवजा दिए किसी का घर तोड़ देना कहां तक उचित। यह बात आवास बोर्ड एवं जिला प्रशासन को क्यों समझ नहीं आ रही है। जिला प्रशासन को करवाई करने से पहले देखना चाहिए था कि जिनका मकान तोड़ने जा रहा है, क्या उन लोगों को मुआवजा मिला। अगर आवास बोर्ड ने मुआवजा नहीं दिया तो फिर प्रशासन की टीम उनके घर पर कैसे पहुंच गई। क्या प्रशासनिक अधिकारी किसानों एवं निवासियों को मुआवजा दिलाने के लिए कोई पहल करेंगे।

स्थानीय निवासी जगह-जगह इकट्ठा हो रहे हैं और धीरे-धीरे घटनास्थल की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर सैकड़ों घर अतिक्रमण कर बने हैं, तो प्रशासन ने इनका निर्माण रोकने के लिए कोश‍िश क्‍यों नहीं की। मजे की बात तो यह है कि इस इलाके में अब भी हर रोज मकान बन रहे हैं। 

Edited By: Shubh Narayan Pathak