लंदन, एपी। कोरोना संक्रमण में थोड़ी राहत मिलने के बाद हो रहे दुनिया के सबसे अमीर सात देशों (जी 7) के शिखर सम्मेलन का नजारा बदला-बदला है। दो साल में पहली बार हो रहे इस सम्मेलन में नेता घुल-मिलकर वन-टू-वन बात कर रहे हैं तो कई देशों के नेता गोल मेज के इर्द-गिर्द बैठकर भी बतिया रहे हैं। सम्मेलन में वैश्विक टीकाकरण को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा हो सकती है।

जॉनसन कर रहे मेजबानी

दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड में समुद्र के किनारे बने कार्बिस बे रिजॉर्ट में ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन समेत फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा के नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं। जनवरी में राष्ट्रपति बनने के बाद बाइडन की तो यह पहली विदेश यात्रा है। अब ये नेता पिछला भूलकर भविष्य के लिए बेहतर करने के फॉर्मूले पर कार्य करने के लिए एकत्रित हुए हैं।

सबका सुरक्षित होना जरूरी

जॉनसन के अनुसार अब समय छोटे फायदों से परे हटकर सोचने का है। यह समय दुनिया के सबसे बड़े और तकनीक संपन्न लोकतांत्रिक देशों को ज्यादा जिम्मेदारी से कार्य करने का है। हमें कोविड महामारी से बचाव के लिए दुनिया के टीकाकरण की जिम्मेदारी उठानी चाहिए क्योंकि दुनिया में जब तक सब सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक दुनिया में कोई सुरक्षित नहीं है। अगर एक भी व्यक्ति बिना वैक्सीन वाला है, तो महामारी फिर से लौटकर आ सकती है।

पर्यावरण के लिए खास योजना

जॉनसन ने इस शिखर सम्मेलन को पर्यावरण के लिए खास मानते हुए इसकी योजना बनाई थी। वह ग्लास्गो में नवंबर में संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले होने वाले वैश्विक पर्यावरण सम्मेलन के लिए दुनिया का एजेंडा जी 7 शिखर सम्मेलन से ही निश्चित करना चाह रहे हैं। वैसे बाइडन पर्यावरण सुरक्षा के मिशन की शुरुआत कर चुके हैं। आने वाले समय में यह एजेंडा और प्रभावी हो सकता है।

वैक्सीन पेटेंट में ढील के खिलाफ है जर्मनी

जी-7 की बैठक में जहां वैश्विक टीकाकरण अभियान को लेकर बड़ी घोषणा की उम्मीद बन रही है, वहीं बर्लिन में जर्मनी ने वैक्सीन निर्माण के सिलसिले में पेटेंट की शर्तों में ढील देने पर अपनी असहमति जता दी है। पेटेंट की शर्तो में ढील दिए बगैर भारत और दक्षिण अफ्रीका जैसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश दुनिया भर में विकसित हुई वैक्सीन का उत्पादन नहीं कर पाएंगे।

पेटेंट कानून में ढील की सिफारिश

इसके चलते दुनिया के सभी देशों को आवश्यकता के अनुसार कोविड से बचाव की वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो पाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी पेटेंट कानून में ढील की सिफारिश कर चुका है लेकिन विश्व व्यापार सम्मेलन से इतर जर्मनी ने इस प्रस्ताव पर खुला विरोध जता दिया है। पेटेंट कानून को ढील न दिए जाने के पीछे जर्मनी और अन्य विकसित देशों का तर्क है कि इससे निजी क्षेत्र की कंपनियों की शोध और दवा विकसित करने की मंशा पर गलत असर पड़ सकता है।