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ब्रिटेन के कोर्ट ने सट्टेबाज चावला के प्रत्यर्पण की मांग ठुकराई

जिला जज रेबेका क्रेन ने 2000 के क्रिकेट मैच फिक्सिंग के प्रमुख आरोपी चावला को मानवाधिकारों के आधार पर बरी कर दिया।

By Ravindra Pratap SingEdited By: Published: Sun, 05 Nov 2017 05:25 PM (IST)Updated: Sun, 05 Nov 2017 07:25 PM (IST)
ब्रिटेन के कोर्ट ने सट्टेबाज चावला के प्रत्यर्पण की मांग ठुकराई
ब्रिटेन के कोर्ट ने सट्टेबाज चावला के प्रत्यर्पण की मांग ठुकराई

लंदन, प्रेट्र। ब्रिटेन के कोर्ट ने हाल के हफ्तों में दो मामले में प्रत्यर्पण की मांग को खारिज कर दिया है। इसी अदालत में शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण के मामले की सुनवाई चल रही है।

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लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 16 अक्टूबर को कथित सट्टेबाज संजीव कुमार चावला के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके अलावा कोर्ट ने 12 अक्टूबर को ब्रिटिश भारतीय दंपती जतिंदर और आशा रानी अंगुराला को बैंक धोखाधड़ी के मामले में बरी कर दिया। कोर्ट के ये फैसले माल्या के प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई से कुछ ही दिनों पहले आए हैं। चार दिसंबर को होने वाली सुनवाई से पहले कोर्ट 20 नवंबर को प्रत्यर्पण मामले की रूपरेखा तय करेगा।

जिला जज रेबेका क्रेन ने 2000 के भारत-दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट मैच फिक्सिंग के प्रमुख आरोपी चावला को मानवाधिकारों के आधार पर बरी कर दिया। उन्होंने तिहाड़ जेल की स्थितियों का हवाला देते हुए फैसला सुनाया जहां प्रत्यर्पण के बाद उसे रखा जाना था। हालांकि उन्होंने माना कि प्रथम दृष्ट्या इस मामले में चावला की भूमिका है। अंगुराला दंपती के मामले को वरिष्ठ जिला जज एम्मा अरबुथनॉट ने लंबा समय बीतने के आधार पर खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा कि करीब 25 साल के बाद उनका प्रत्यर्पण न्यायोचित नहीं होगा। अंगुराला दंपती 1990 से 1993 के बीच बैंक घोटाले में वांछित हैं। तब जतिंदर जालंधर के बैंक ऑफ इंडिया में शाखा प्रबंधक था। अंगुराला दंपती अब ब्रिटिश नागरिक हैं। जून 2015 में प्रत्यर्पण वारंट पर उन्हें गिरफ्तार किया गया था और बाद में सशर्त जमानत पर छोड़ दिया गया। भारत और ब्रिटेन के बीच 1992 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर हुए और नवंबर 1993 से यह लागू है।

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