लंदन, प्रेट्र। भारतीय बैंकों के नौ हजार करोड़ रुपये लेकर भागे विजय माल्या को ब्रिटिश हाई कोर्ट से राहत मिली है। उसे खर्च भत्ते के रूप में अब तीन गुनी रकम यानी 16 लाख 40 हजार रुपये हर सप्ताह मिला करेंगे।

30 जनवरी को जस्टिस रॉबिन नोल्स ने अपने फैसले में माल्या की याचिका पर सहमति दे दी। माल्या के वकीलों ने हाई कोर्ट में अर्जी दी थी कि खर्च के लिए उसे मिलने वाला साप्ताहिक भत्ता पर्याप्त नहीं है। हाई कोर्ट को उसने अपनी निजी खर्चे का ब्योरा भी दिया। जिसके बाद उसे कुछ राहत मिल सकी। फिलहाल शराब कारोबारी बड़ी मुसीबत में है। उसको तगड़ा झटका तब लगा जब ब्रिटिश हाई कोर्ट ने माल्या को आदेश दिया कि वह सिंगापुर की कंपनी बीओसी एविएशन को 575 करोड़ रुपये का हर्जाना अदा करे।

किंगफिशर एयरलाइंस से हुए कारोबार को लेकर यह केस दायर किया गया था। कर्नाटक के रिकवरी ट्रिब्यूनल से आया फैसला भी उसके लिए मुसीबत बन रहा है। ब्रिटिश अदालत ने माल्या की संपत्तियों को फ्रीज करने का आदेश दिया था। इनमें माल्या के साथ उनकी सहयोगी कंपनियों लेडी वाक एलएलपी, रोज कैपिटल वेंचर लि. व आरेंज इंडिया होल्डिंग को भी पार्टी बनाया गया है। इन कंपनियों पर कई तरह की आर्थिक पाबंदियां भी लगाई गई हैं। इस मामले में यूके फॉरेन जजमेंट एक्ट 1933 के तहत 12 अप्रैल को सुनवाई शुरू होगी। यह दो दिनों तक चलेगी। पिछले साल 24 नवंबर को ब्रिटेन के हाई कोर्ट में क्वींस बेंच डिवीजन के सामने एक याचिका लगाई गई थी, जिसमें 13 भारतीय बैंकों से की गई धोखाधड़ी का जिक्र है।

माल्या के प्रत्यर्पण का मामला भी अब निर्णायक सुनवाई में है। पिछले साल चार दिसंबर से उसके खिलाफ वेस्टमिनिस्टर की कोर्ट में सुनवाई चल रही है। 16 मार्च को इसकी सुनवाई होगी। जज ए. एम्मा उस दौरान देखेंगी कि भारत सरकार की पैरवी कर रही क्राउन प्रॉसीक्यूशन सर्विस द्वारा रखे गए साक्ष्य गौर करने लायक हैं भी या नहीं। मोदी सरकार की दलील है कि माल्या को वापस भारत भेजा जाए। माल्या की जमानत दो अप्रैल तक बढ़ाई गई है। मई में इस केस का फैसला आने की उम्मीद है।

By Manish Negi