लंदन, प्रेट्र। ब्रिटेन और भारत के पर्यावरण वैज्ञानिक दिल्ली के वायु प्रदूषण से निपटने के लिए मिलकर काम करेंगे जो राष्ट्रीय राजधानी के दो करोड़ से ज्यादा लोगों को प्रभावित कर रहा है।

ब्रिटेन ने आइएमइएस, आइआइटीएम और आइआइटी-एम से मिलाया हाथ

मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों ने इसके लिए भारतीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (आइएमइएस), भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आइआइटीएम) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मद्रास (आइआइटी-एम) से हाथ मिलाया है। उनका नया और जारी अध्ययन प्रदूषण संकट के कारणों की पहचान करेगा।

दिल्ली में वायु प्रदूषण धूल, भारी ट्रैफिक, अपशिष्टों को जलाए जाने से है

मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के दल के प्रमुख प्रोफेसर हग कोए ने कहा, 'दिल्ली में वायु प्रदूषण कई कारकों से जुड़ा हुआ है, जिनमें भारी ट्रैफिक, अपशिष्टों को जलाया जाना, मॉनसून से पहले धूल भरी हवा का चलना शामिल है। बदलते मौसम में फसलों का जलाया जाना भी प्रदूषण का बहुत महत्वपूर्ण स्त्रोत है।

प्रदूषण से फेफड़ों को नुकसान, हृदय रोग जैसी स्थितियां पैदा होती हैं

प्रदूषण के भी काफी व्यापक प्रकार हैं जिनमें फेफड़ों को नुकसान, हृदय रोग, बौद्धिक अक्षमता और वायु गुणवत्ता से जुड़ी अन्य स्थितियां पैदा होती हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'शोध अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन इससे कुछ जानकारियां मिली हैं। अब तक हमने जो काम किया है उससे पता चलता है कि शहर भर में पार्टिकुलेट मैटर के संकेंद्रण में कुछ भिन्नता है, लेकिन इसमें अलग-अलग स्त्रोतों का योगदान लगभग समान है।'

Posted By: Bhupendra Singh

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