लंदन, प्रेट्र। हिम युग के दौर में साइबेरिया के टुंड्रा प्रदेशों में पाए जाने वाले मैमथ (विशालकाय हाथी) हजारों साल पहले विलुप्त हो चुके हैं। जीवाश्मों का अध्ययन कर शोधकर्ताओं इनके रहन-सहन के बारे में नई-नई जानकारियां समय-समय पर देते रहते हैं। मैमथ बारे में हाल ही में हुए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि आर्कटिक महासागर के रेंगल आइलैंड में रहने वाले दुनिया के आखिरी मैमथ की मौत चरम मौसमी घटनाओं के कारण चार हजार साल पहले हुई थी। फिनलैंड की हेलसिंकी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं सहित एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने उन चरम मौसमी घटनाओं के परिदृश्यों को एक कंप्यूटर मॉडल के जरिये बनाकर इन विशालकाय हाथियों के विलुप्त होने के कारण का पता लगाया है।

हिम युग के दौर में साइबेरिया में पाए जाते थे मैमथ

जर्नल क्वाटर्नरी साइंस रिव्यू में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, हिम युग के आखिरी समय (एक लाख से 15 हजार साल पहले) तक मैमथ उत्तरी गोलाद्र्ध में स्पेन से लेकर अलास्का तक फैले रहते थे। 15 हजार साल पहले शुरू हुई ग्लोबल वार्मिंग के कारण इनके आवास धीरे-धीरे उत्तरी साइबेरिया और अलास्का में ही सीमित हो गए। समुद्री पानी का स्तर बढ़ने के कारण रेंगल आइलैंड में रहने वाले मैमथ दूसरी दुनिया से कट गए और यहां इसकी आबादी अगले सात हजार साल तक जीवित रही। शोधकर्ताओं की टीम में जर्मनी की ट्यूबिंगन यूनिवर्सिटी और रशियन एकेडमी ऑफ साइंस के शोधकर्ता भी शामिल थे। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने उत्तरी साइबेरिया, अलास्का, यूकान और रैंगल आइलैंड से मिले मैमथ के जीवाश्मों (दांत, हड्डियां आदि) का अध्ययन किया।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण खत्म हो गई इनकी आबादी

इस दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि रैंगल आइलैंड पर मैमथ के जीवाश्म गर्मी बढ़ने के बाद भी दस हजार साल तक पूरी तरह खत्म नहीं हुए थे। इसका अर्थ है कि ग्लोबल वार्मिंग के शुरू होने के बाद भी कई सालों तक मैमथ ने खुद को जलवायु के अनुकूल बनाए रखने की कोशिश की होगी। वहीं, दूसरी ओर यूक्रेन और रूस के मैदानों में मैमथ 15,000 साल पहले ही गायब हो गए थे, जबकि अलास्का के सेंट पॉल द्वीप के मैमथ 5,600 साल पहले विलळ्प्त हो गए थे। अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने कहा कि दोनों ही मामलों में इनकी आबादी के अंतिम प्रतिनिधियों की शारीरिक संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिले, जिसका अर्थ है कि विलुप्त होने से पहले उनके पर्यावरण में भारी बदलाव आया होगा।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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