लंदन, आइएएनएस। कोरोना वायरस महामारी से पूरी दुनिया में लोग तेजी से संक्रमित हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण के साथ इसकी रिकवरी दर भी तेज है। लेकिन एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि कोरोना से ठीक हुए कुछ मरीजो में यह वायरस रह सकता है और इसको लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि कुछ कोरोना मरीजों में कोरोना वायरस रह सकता है। ऐसे में लोगों को यह सुझाव दिया जा रहा है कि कोरोना से ठीक हुए मरीज अधिक सतर्क रहें और दूसरों के साथ निकट संपर्क में आने से बचें।

अमेरिकी जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, कोरोना संक्रमण से पूरी तरह से ठीक समझे जाने वाले 17 प्रतिशत मरीज मफॉलो-अप स्क्रीनिंग में कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए। शोध के मुताबिक, जिन कोरोना मरीजों में श्वसन संबंधी लक्षण, विशेष रूप से गले में खराश और राइनाइटिस होते रहे, उनके टेस्ट में फिर से कोरोना पॉजिटिव संभावना अधिक है।

शोध में आगे कहा गया है कि इससे पता चलता है कि इन दोनों लक्षणों की दृढ़ता को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए और कोरोना से उबरने वाले सभी मरीजों में इसका पर्याप्त रूप से मूल्यांकन किया जाना चाहिए। इटली में कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ द सेक्रेड हार्ट के प्रमुख लेखक फ्रांसेस्को लैंडी ने कहा कि डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने कोरोना के तीव्र चरण पर ध्यान केंद्रित किया है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाले प्रभावों के लिए निर्वहन के बाद निरंतर निगरानी की आवश्यकता है।

अध्ययन में 131 मरीज शामिल थे जो अनुवर्ती यात्रा से कम से कम दो सप्ताह पहले क्वारंटाइम के बंद होने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानदंडों को पूरा करते हैं। डब्ल्यूएचओ के मानदंड निर्दिष्ट करते हैं कि मरीजों को तीन दिनों तक बुखार कम करने वाली दवाओं के बिना बुखार से मुक्त होना चाहिए, कोविद -19 से संबंधित किसी भी लक्षण में सुधार दिखाना, पिछले सात दिनों से अधिक कोई लक्षण ना होना, और वायरस जांच में दो बार नेगेटिव टेस्ट।

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