लंदन, रायटर। फिनलैंड और स्वीडन के नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) में शामिल होने की प्रबल इच्छा देखते हुए रूस ने इससे सैन्य तनाव बढ़ने की चेतावनी दी है। कहा है कि अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो में विस्तार को रूस स्वीकार नहीं करेगा। वास्तव में यह एक बड़ी गलती है जिसे पश्चिमी देश नहीं समझ रहे।

1999 से रूस की सत्ता पर काबिज व्लादिमीर पुतिन ने कई मौकों पर कहा है कि सोवियत संघ के विघटन के बाद नाटो का विस्तार केवल रूस की सीमाओं पर दबाव बढ़ाने के लिए हुआ है। इसी के कारण रूस ने यूक्रेन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। रूस से करीब 1,300 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करने वाले फिनलैंड के नाटो में शामिल होने के फैसले से पुतिन को फिर वही खतरा महसूस हो रहा है। फिनलैंड के राष्ट्रपति निनिस्तो से सीधी बात में पुतिन द्विपक्षीय संबंध खराब होने की आशंका जता चुके हैं। इससे पहले रूस फिनलैंड को सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे चुका है।

नाटो के विस्तार से यूरोप की सुरक्षा मजबूत नहीं बल्कि कमजोर होगी : क्रेमलिन

फिनलैंड और स्वीडन के नाटो की सदस्यता के लिए तैयार होने से रूस एक बार फिर सुरक्षा संबंधी चुनौती का सामना कर रहा है। रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रिबकोव ने कहा है कि वाशिंगटन और ब्रसेल्स को इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि मास्को इस विस्तार को साधारण तरीके से स्वीकार करेगा। हेलसिंकी और स्टाकहोम का नाटो में शामिल होने का फैसला वस्तुत: बड़ी गलती है, जो उसे आने वाले समय में ज्ञात होगा। दोनों देशों की ओर से नाटो में शामिल होने के आए संकेतों के बाद अप्रैल में रूस ने फिनलैंड सीमा के नजदीक परमाणु हथियारों से लैस हाइपरसोनिक मिसाइलें तैनात करने की चेतावनी दी थी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि नाटो के विस्तार से यूरोप की सुरक्षा मजबूत नहीं बल्कि कमजोर होगी।

Edited By: Dhyanendra Singh Chauhan