लंदन, आइएएनएस। कोरोना वायरस (कोविद-19) के खिलाफ लड़ाई में शोधकर्ताओं ने गायन से बचने की सलाह दी है। इसकी वजह बताते हुए शोधकर्ताओं ने बताया कि गायन, विशेष रूप से जोर से गाने के दौरान बहुत सारे एरोसोल कण और ड्रॉपलेट्स आसपास की हवा में फैलते हैं जिससे वायरस के फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

स्वीडन के लुंड यूनिवर्सिटी में किया गया शोध

स्वीडन के लुंड यूनिवर्सिटी में किए गए इस शोध के लेखकों ने कहा कि अध्ययन में हमने पाया जब गाते हैं तो अधिक मात्रा में ड्रॉपलेट्स निकलते हैं जो आसपास के लोगों में वायरस का संक्रमण फैलाने में योगदान करते हैं। ऐसा दुनियाभर में प्रकाशित कई रिपोर्ट में भी कहा गया है। इसलिए, गायन को सुरक्षित बनाने के लिए पूरी दुनिया में अलग-अलग प्रतिबंध लगाए गए हैं। हालांकि, लुंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जकोब लोंडाहल ने कहा कि गाने के दौरान निकलने वाले एयरोसोल कणों और बड़े ड्रॉपलेट्स की संख्या की कोई वैज्ञानिक जांच नहीं हुई है।

गायन के दौरान छोटे ड्रॉपलेट्स का कुछ मिनटों के बाद प्रभाव खत्म हो जाता है

एरोसोल साइंस एंड टेक्नोलॉजी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में 12 स्वस्थ गायकों और दो कोरोना संक्रमित गायकों को शामिल किया गया था। अध्ययन के शोधकर्ता मालिन अलस्वेद ने कहा, प्रतिभागियों में से सात पेशेवर ओपेरा गायक थे। गायन के दौरान कुछ ड्रॉपलेट्स इतने बड़े पाए गए कि गिरने से पहले ही कुछ डेसीमीटर तक की दूरी तय कर लेते हैं। साथ ही छोटे ड्रॉपलेट्स भी कुछ दूरी तो तय कर लेते हैं, लेकिन कुछ मिनटों के बाद उनका प्रभाव खत्म हो जाता है।

जीतेगा भारत हारेगा कोरोन

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