लंदन, एएनआइ। पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लोगों ने 22 अक्टूबर को ब्लैंक डे बनाया। उन्होंने लंदन में पाकिस्तान उच्चायोग के बाहर पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों से पीओके और गिलगिट बाल्टिस्तान छोड़न की मांग की। लोगों ने पाकिस्तान सेना के विरोध में नारे भी लगाए। बता दें कि पाकिस्तान ने 1947 में इस क्षेत्र पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था।

जम्मू कश्मीर नेशनल अवामी पार्टी के अध्यक्ष सजद राजा ने कहा कि हम सभी 22 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के ऊपर हुए पाकिस्तानी हमले के विरोध में यहां एकत्रित हुए हैं। हम पाकिस्तान के खिलाफ विरोध कर रहे हैं, क्योंकि 1947 को इसी दिन हमारे राज्य का विभाजन किया गया था और तब से हमारे लोगों को दबाया और पीड़ित किया जा रहा है। वो पाकिस्तान की साजिश थी, जो अभी भी जारी है।

सज्जद ने कहा, 'हम दुनिया को एक संदेश देना चाहते हैं कि इस तरह की गतिविधि और क्रूरता को स्वीकार नहीं किया जाएगा। आओ, हम कभी भी हार नहीं मानेंगे और जम्मू राज्य में पाकिस्तानी कब्जे के खिलाफ अपने संघर्ष को जारी रखेंगे। हम मानते हैं कि यह एक पाकिस्तानी साजिश थी जिसके परिणामस्वरूप कश्मीर में भारतीय हस्तक्षेप हुआ। इसके परिणामस्वरूप कश्मीर, भारत और पाकिस्तान के बीच बंट गया था। इस विभाजन का मूल कारण 22 अक्टूबर है, जो इस्लाम और भाईचारे के नाम पर किया गया था। हम इस गतिविधि की निंदा करते हैं और हम संघर्ष जारी रखेंगे'।

प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान 'इज आज़ाद कश्मीर रियली आजाद', 'एबोलिश एक्ट 74 एंड जीबी ऑर्डर 2018', और 'पाकिस्तानी कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में बुनियादी मानवाधिकारों और सामाजिक अधिकारों को पुनर्स्थापित करें' जैसे बैनर लहराए। जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय अवामी पार्टी के सचिव रिजवान सिद्दीकी ने कहा, 'हम मानते हैं, अगर 22 अक्टूबर को पाकिस्तान द्वारा यह साहस नहीं किया गया होता, तो हमारा राज्य स्वतंत्र होता। कश्मीर में खून बह रहा है और यह पाकिस्तान द्वारा की गई एक सोची समझी गलती का परिणाम है।

Posted By: Arti Yadav

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