लंदन [प्रेट्र]। अस्पतालों में हैंड ड्रायर्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ये पेपर टॉवल (टिश्यू पेपर) से भी ज्यादा रोगाणु फैलाते हैं। यह चेतावनी एक अध्ययन में दी गई है। जर्नल ऑफ हॉस्पिटल इंफेक्शन में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि ब्रिटेन, फ्रांस और इटली के दो-दो अस्पतालों के शौचालयों में रोगाणुओं के फैलने के मुख्य कारणों का पता लगाया गया। इसके लिए शोधकर्ताओं ने एक खास व्यवस्था की। जिन अस्पतालों में जांच की जा रही थी उनमें टिश्यू पेपर और हैंड ड्रायर दोनों थे, लेकिन एक दिन में केवल एक का ही प्रयोग किया जा सकता था।

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स में प्रोफेसर मार्क विल्कोक्स ने कहा, ‘हम ये जानना चाहते थे कि टिश्यू पेपर का प्रयोग ज्यादा बेहतर है या हैंड ड्रायर का। इसी उद्देश्य से तीन देशों में यह अध्ययन किया गया। इसमें सामने आया कि हैंड ड्रायर के कारण रोगाणु ज्यादा फैलते हैं। असल में समस्या तब शुरू होती है, जब लोग हाथों को ठीक से नहीं धोते। ऐसे में जब वे हैंड ड्रायर का इस्तेमाल करते हैं तो उनके हाथों से रोगाणु फैलने लगते हैं। हमारे अध्ययन में सामने आया कि हवा से रोगाणु उड़ गए और पूरे शौचालय में फैल गए।

यह दिया सुझाव

शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि यदि दोनों विकल्प मौजूद हों तो टिश्यू पेपर का प्रयोग करना चाहिए। इससे रोगाणुओं के फैलने का खतरा कम हो जाता है।

यह दिखा असर

विल्कोक्स कहते हैं, हमने अध्ययन में देखा कि हैंड ड्रायर एक एयरोसोल के तौर पर काम करने लगा, जिसने सिंक, दीवार और सतहों समेत समूचे शौचालय को दूषित कर दिया। ऐसे में जब लोग इन चीजों को छूते तो वे रोगाणुओं और वायरस के संपर्क में आ जाते। रोगाणु कहां-कहां फैलेंगे यह इस बात पर निर्भर करता है कि ड्रायर को किस तरह से डिजाइन किया गया है।’

विपरीत परिणाम आए सामने

हैंड ड्रायर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि हाथ सुखाने के लिए उन्हें छूने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे में उम्मीद की जाती है कि इससे रोगाणुओं के फैलने की आशंका बेहद कम जो जाएगी, लेकिन इस अध्ययन में इसके विपरीत बात सामने आई है। वहीं, दूसरी तरफ टिश्यू पेपर हाथ पर बचे पानी और रोगाणुओं को सोख लेते हैं और अगर उन्हें उचित तरीके से निस्तारित किया जाता है तो इसके रोगाणुओं के प्रसार का खतरा काफी हद तक कम होता है।

Posted By: Sanjay Pokhriyal