लंदन, एएनआइ। अमेरिका की नजरों में जम्मू-कश्मीर की स्थिति बहुत खराब दर्शाने के लिए पाकिस्तान वहां आतंकियों के जरिये बड़ा खूनखराबा करा सकता है। प्रधानमंत्री इमरान खान अमेरिका जाकर खुद ही कह आए हैं कि पाकिस्तान में 30-40 हजार आतंकी मौजूद हैं।

वह जताना चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर और अफगानिस्तान में वारदात यही आतंकी करते हैं, उनसे पाकिस्तान की सरकार या सेना का कोई मतलब नहीं होता। भारत ने पाकिस्तान की मंशा को भांपते हुए जम्मू-कश्मीर में दो टुकड़ों में 38 हजार केंद्रीय पुलिस बल की तैनाती की है।

हालात पर प्रतिक्रिया जताते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लेखक और राजनीतिक कार्यकर्ता शबीर चौधरी के अनुसार भारत के कदम से पाकिस्तान और उसकी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। कहा कि भारत के कदम का जवाब देने का पाकिस्तान सरकार पर दबाव बनेगा, और जब वह जवाबी कदम उठाएगी तो उसकी अर्थव्यवस्था में और गिरावट आएगी।

एम्सटर्डम स्थित यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज के निदेशक जुनैद कुरैशी के अनुसार इमरान खान के कुबूलनामे ने पाकिस्तान सरकार की आतंकवाद को लेकर नीति की कलई खोल दी है।

उन्होंने मान लिया है कि जम्मू-कश्मीर और अफगानिस्तान में पाकिस्तान से जाने वाले आतंकी ही हमले करते हैं। वह आतंकियों की पनाहगाह बना हुआ है। इससे पता चलता है कि पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना के फायदे आतंकियों से जुड़े हुए हैं। वे ही इन्हें अपने राजनीतिक हितों और छद्म युद्ध के लिए इस्तेमाल करते हैं।

यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी के सरदार शौकत अली के अनुसार पाकिस्तान अपने कब्जे वाली कश्मीरी धरती का दुरुपयोग कर रहा है। वह वहां आतंकी तैयार कर उन्हें वारदात के लिए जम्मू-कश्मीर भेजता है। पाकिस्तानी सेना इन आतंकियों को प्रशिक्षण देती है और अपने हितों के मुताबिक उनका इस्तेमाल करती है। गुलाम कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान की धरती का आतंकियों के प्रशिक्षण और उन्हें भेजने के लिए इस्तेमाल होता है।

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Posted By: Nitin Arora

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