लंदन, प्रेट्र। ब्रिटेन की जिस जज ने नीरव मोदी को जमानत देने से मना कर दिया वह उन्हें भरोसा दिलाने में नाकाम रहा। भगोड़ा हीरा कारोबारी तीसरी बार जमानत लेने में विफल साबित हुआ। उसने अमानत राशि दोगुनी 20 लाख पौंड (18 करोड़ रुपये ज्यादा) करने और लंदन स्थित अपने फ्लैट में 24 घंटे कर्फ्यू की हालत में बंद रहने की पेशकश की थी। इसके बाद भी जज एम्मा अब्रुथनोट ने जमानत नामंजूर कर दी क्योंकि वह यह समझाने में नाकाम रहा कि ब्रिटेन के साथ उसका सामुदायिक संबंध पर्याप्त रूप से मजबूत है और उसके भाग निकलने का खतरा नहीं है।

जज ने ठुकराई जमानत की अर्जी
48 वर्षीय नीरव पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाला और मनी लांड्रिंग मामले में वांछित है। जमानत की तीसरी अर्जी पर सुनवाई के दौरान ऐसा भी लगा था कि जज उसे 24 घंटे कर्फ्यू जैसी स्थिति की पेशकश पर जेल से बाहर आने की अनुमति दे सकती हैं। लेकिन आखिर में जज ने गवाहों और सुबूतों में हस्तक्षेप की आशंका को ध्यान में रखते हुए भगोड़े हीरा कारोबारी की पेशकश ठुकरा दी। सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआइ की टीम के साथ ही भारतीय उच्चायोग के अधिकारी भी कोर्ट में मौजूद थे। क्राउन प्रोसीक्यूशन सर्विस ने भारत का पक्ष रखा। 

गौरतलब है कि नीरव मोदी ने 2015 में निवेशक वीजा का आवेदन दिया था। उस समय धनी व्यक्तियों के लिए तथाकथित गोल्डन वीजा रूट को अपेक्षाकृत रूप से आसान किया गया था। ऐसे लोग न्यूनतम 20 लाख पौंड के निवेश पर ब्रिटेन में रहने का अधिकार हासिल कर सकते थे।

स्कॉटलैंड यार्ड अधिकारियों ने सेंट्रल लंदन बैंक ब्रांच से नीरव को गिरफ्तार किया था। वह वहां नया बैंक खाता खोलने के लिए पहुंचा था। सबसे पहले डिस्टि्रक जज मैरिए माल्लोन ने 20 मार्च को जमानत देने से इन्कार किया था। गिरफ्तारी के बाद से वह एचएमपी वैंड्सवर्थ जेल में बंद है

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Posted By: Dhyanendra Singh

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