लंदन, रायटर। ज्यादातर लोगों का मानना है कि दो साल पहले के मुकाबले दुनिया ज्यादा खतरनाक हो गई है। राजनीतिक से प्रेरित हिंसा और सामूहिक संहार के हथियारों के बढ़ते जखीरे के कारण अपनी सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। 

ग्लोबल चैलेंज फाउंडेशन के एक सर्वे में कहा गया है कि हर दस में से छह व्यक्ति यानी 60 फीसदी लोग मानते हैं कि दुनिया पहले के मुकाबले ज्यादा जोखिम भरी हो गई है। ऐसे लोगों का कहना है कि तेजी से बढ़ती जनसंख्या या जलवायु परिवर्तन के बजाय अब राजनीतिक संघर्ष और रासायनिक हथियारों से दुनिया को ज्यादा खतरा है।

फाउंडेशन के वाइस चेयरमैन मैट्स एंडरसन के अनुसार, `यह स्पष्ट है कि वैश्विक सहयोग की मौजूदा प्रणाली लोगों की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने में नाकाम है। नाटो देशों और रूस में तनाव, सीरिया में जारी संघर्ष और उत्तर कोरिया एवं ईरान की एटमी महात्वाकांक्षाओं के कारण लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।`

युद्ध की आशंका के बादल
लंदन के रायल इंस्टीट्यूट अॉफ इंटरनेशनल अफेयर्स में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की निदेशक डॉ. पैट्रीशिया लेविस का कहना है कि इस समय दुनिया पहले से ज्यादा अस्थिर है और अक्सर युद्ध के पहले ऐसे ही हालात होते हैं। दुनिया की दो बड़ी शक्तियां सभी स्थापित नियमों को तार-तार करने पर आमादा हैं। रूस को हमलोगों ने उक्रेन पर हमला करते देखा। उधर अमेरिका ने चीन सहित दुनिया के कई बड़े देशों के खिलाफ ट्रेड वार शुरू कर दिया है।

दस देशों में किया गया सर्वे
ग्लोबल चैलेंज फाउंडेशन ने इस सर्वे में दस देशों के 10 हजार से ज्यादा लोगों को शामिल किया। इस सर्वे में रूस से शामिल 1000 लोगों में से 91 फीसदी ने कहा कि सामूहिक संहार के हथियार के कारण आज वैश्विक सुरक्षा को ज्यादा खतरा है।

By Brij Bihari Choubey