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रूस, ईरान, AI और आतंकवाद... MI5 चीफ ने ब्रिटेन की सुरक्षा पर मंडराते बड़े खतरों से किया आगाह

Published: Wed, 14 Oct 2026 09:47 AM (IST)Updated: Wed, 14 Oct 2026 09:53 AM (IST)

AI और आतंकवाद जैसे अदृश्य खतरे ब्रिटेन की आंतरिक सुरक्षा के लिए नासूर बन चुके हैं। ऐसे में MI-5 की ...और पढ़ें

MI5 के जासूस प्रमुख केन मैक्कलम।

MI5 के जासूस प्रमुख केन मैक्कलम।

HighLights

  1. रूस को पश्चिमी देशों के लिए 'नंबर वन एग्रेसर' बताया।

  2. ईरान आपराधिक गिरोहों से ब्रिटेन में विरोधी निशाना बना रहा।

  3. AI साइबर युद्ध और बायोवेपन के खतरे बढ़ा रहा है।

डिजिटल डेस्क, लंदन। क्या ब्रिटेन के ऊपर कोई बड़ा संकट मंडरा रहा है? ऐसा सवाल आज इसलिए खड़ा हो रहा है, क्योंकि ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI5 के प्रमुख केन मैक्कलम ने अपने हालिया संबोधन में दुनिया के सामने खड़े गंभीर सुरक्षा संकटों का कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख दिया है।

अपने संबोधन में मैक्कलम ने बताया कि ब्रिटेन की सुरक्षा व्यवस्था को किन देशों और तकनीकों से सबसे बड़ा खतरा है। 

दुनिया का 'नंबर वन एग्रेसर' रूस

एमआई-5 प्रमुख ने रूस को पश्चिमी देशों के लिए सबसे बड़ा खतरा यानी 'एग्रेसर नंबर वन' करार दिया है। मैक्कलम ने इसकी वजह पर जोर देते हुए बताया कि रूस खुलेआम युद्ध करने के बजाय छुपकर या साइबर माध्यमों से नुकसान पहुंचाने को बढ़ावा दे रहा है, ताकि सीधे तौर पर NATO देशों से सीधा युद्ध छिड़ने की नौबत न आए।

मैक्कलम ने रूस और यूक्रेन के बीच के संघर्ष का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि यूक्रेन पर हमले के बाद से ब्रिटेन और अन्य देशों ने रूसी दूतावासों से करीब 1000 अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इससे रूस की ताकत कमजोर हुई है। अब रूस अपनी चालें चलने के लिए स्थानीय स्वयंसेवकों और अपराधियों का सहारा ले रहा है।

ईरान भी ब्रिटेन के लिए चिंता का सबब

रूस के अलावा ब्रिटेन के लिए ईरान भी बड़ा चिंता का विषय है। इसका कारण समझाते हुए मैक्कलम ने बताया कि ईरान ब्रिटेन में अपने विरोधियों, ईरानी मीडिया संगठनों और विशेष तौर पर इजरायली हितों को निशाना बनाने के लिए अपराधी गिरोहों का इस्तेमाल कर रहा है।

पिछले एक साल में ईरान समर्थित गतिविधियों के चलते ब्रिटेन में 50 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इन हमलों का मुख्य निशाना यहूदी समुदाय और अब ब्रिटेन के सैन्य ठिकाने बनते जा रहे हैं। हालांकि, ईरान हमेशा से इन आरोपों को खारिज करता आया है।

AI- साइबर युद्ध और आतंकवाद का नया हथियार

देशों के अलावा अब AI के बढ़ते इस्तेमाल ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। एमआई-5 प्रमुख के मुताबिक, एआई ने हैकर्स और सुरक्षा एजेंसियों के बीच चल रहे साइबर युद्ध को सुपरचार्ज कर दिया है। हमलावर अब एआई का इस्तेमाल करके सटीक प्रोपोगंडा और लोगों को बरगलाने वाली सामग्री तैयार कर रहे हैं।

दुनियाभर में डर का माहौल

इतना ही नहीं आतंकवादियों की तरफ से एआई की मदद से खतरनाक बायोवेपन या नए घातक वायरस विकसित करने की आशंका ने दुनिया भर के विशेषज्ञों को डरा दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि इतिहास में पहली बार मानवता ऐसे खतरे के सामने है, जहां कोई तकनीक या सिस्टम इंसान से ज्यादा बुद्धिमान हो सकता है और इंसानों को मात दे सकता है।

आतंकवाद- नस्लीय नफरत और कट्टरपंथ

इस बात को ऐसे समझिए कि ब्रिटेन में इसी साल अप्रैल में राष्ट्रीय आतंकवाद खतरे के स्तर को बढ़ाकर गंभीर कर दिया गया था, यानी अगले छह महीनों में हमले की आशंका बहुत ज्यादा है। अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (IS) जैसे संगठन आज भी लोगों को भड़का रहे हैं।

ऐसे में MI5 प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले एक साल में सबसे खतरनाक ट्रेंड यह देखा गया है कि आव्रजन विरोधी और मुस्लिम विरोधी नफरत तेजी से आतंकवादी सोच में बदल रही है।

उदाहरण के लिए, एक मामले में सिर्फ 13 साल के बच्चे को दक्षिण-पंथी विचारधारा के जरिए कट्टरपंथी बना दिया गया था, जिसके बाद एक विदेशी एजेंसी की मदद से खतरनाक हमले को नाकाम किया गया।

ब्रेक्सिट और रूस का हस्तक्षेप

गौरतलब है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नाहम ने हाल ही में दावा किया था कि रूस ने साल 2016 के यूरोपीय संघ छोड़ने वाले जनमत संग्रह में दखलंदाजी की थी।

इस पर एमआई-5 प्रमुख ने स्पष्ट किया कि यह जगजाहिर है कि जनमत संग्रह के दौरान 'रूस टुडे' जैसे रूसी मीडिया ने काफी आक्रामक रुख अपनाया था और सोशल मीडिया पर ट्रॉल्स व बॉट्स की गतिविधियां भी थीं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि उस दौरान रूसी ऑनलाइन ट्रोलिंग का प्रभाव बहुत ज्यादा असरदार या प्रभावी नहीं रहा था।