लंदन: टेम्स नदी में फंसीं 25 व्हेल, 6 घंटे चले ऑपरेशन के बाद किया गया सुरक्षित रेस्क्यू
लंदन के पास टेम्स नदी में रास्ता भटक कर फंसी दो दर्जन से अधिक पायलट व्हेलों को छह घंटे के ...और पढ़ें
HighLights
लंदन की थेम्स नदी में 25 व्हेल को सुरक्षित निकाला गया।
छह घंटे के संयुक्त अभियान में कई बचाव दल शामिल हुए।
इस बचाव कार्य में दुखद रूप से दो व्हेलों की जान गई।
डिजिटल डेस्क, लंदन। लंदन के पास थेम्स नदी में रास्ता भटक कर फंसी दो दर्जन से अधिक व्हेलों को एक बड़े संयुक्त अभियान के तहत सुरक्षित गहरे समुद्र की ओर निकाला गया। केंट स्थित ग्रेवजेंड के पास थेम्स के ज्वारीय क्षेत्र में व्हेलों का झुंड दिशाहीन होकर तैरता हुआ देखा गया था।
राहत और बचाव दलों, मरीन पायलट्स और स्थानीय प्रशासन ने सप्ताहांत में मिलकर छह घंटे लंबा समन्वित अभियान चलाया और कुल 25 व्हेलों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की।
ग्रेवजेंड के पास भटका था व्हेलों का झुंड
पोर्ट ऑफ लंदन अथॉरिटी के अधिकारियों ने 18 सितंबर को सार्वजनिक चेतावनी जारी की थी, जब ग्रेवजेंड के समीप नदी में व्हेलों का यह समूह देखा गया। आम नागरिकों से अपील की गई थी कि वे इलाके से दूर रहें, ताकि व्हेलें घबराएं नहीं और लोगों की सुरक्षा भी बनी रहे।
इन व्हेलों को एक दिन पहले मरीन पायलट्स ने देखा था। विशेषज्ञों के अनुसार, पायलट व्हेल अक्सर दिखने में डॉल्फिन जैसी लगती हैं, जिससे लोग भ्रमित हो जाते हैं।
दिशाहीन थीं व्हेल, धैर्य के साथ बदली गई रणनीति
पोर्ट ऑफ लंदन अथॉरिटी की हार्बर मास्टर लिन किंडलिन ने बताया कि व्हेलें बेहद भ्रमित दिखाई दे रही थीं और अलग-अलग दिशाओं में तैर रही थीं।
बचाव दलों को बेहद धैर्य से काम लेना पड़ा, बार-बार रुककर व्हेलों की स्थिति का आकलन करना पड़ा और मौके की नजाकत को देखते हुए बार-बार अपनी रणनीति बदलनी पड़ी।
इस अभियान में ब्रिटिश डाइवर्स मरीन लाइफ रेस्क्यू, मरीन पायलट्स और ग्रेवशम तथा थरॉक के स्थानीय प्रशासन की टीमों ने मिलकर काम किया।
आठ नावों और विशेषज्ञों का छह घंटे लंबा मैराथन अभियान
19 सितंबर को सुबह लगभग 7 बजे मध्य लंदन से करीब 32 किलोमीटर पूर्व ग्रेवजेंड में आठ नावों की मदद से यह बचाव अभियान शुरू किया गया। अथॉरिटी के अनुसार, थेम्स नदी व्हेलों का प्राकृतिक आवास नहीं है।
नदी का पानी इनके लिए अत्यधिक उथला है और यहां उनके पर्याप्त भोजन की भी कमी होती है। बचाव दल को अभियान पूरा करने में छह घंटे से अधिक का समय लगा, क्योंकि झुंड में कुछ मादा व्हेल अपने नवजात बच्चों के साथ थीं, जिन्हें बार-बार आराम की जरूरत पड़ रही थी।
रेस्क्यू ऑपरेशन दो व्हेलों की मौत
सफल बचाव के बावजूद इस अभियान के दौरान दुखद रूप से दो व्हेलों की मौत हो गई। इनमें से एक व्हेल पहले से बीमार दिख रही थी और बाद में किनारे पर आ गई। वहीं दूसरी व्हेल भी तट तक पहुंची और फिर पानी में लौट गई, लेकिन बचाव दल के अनुसार बाद में उसी दिन उसकी भी मौत हो गई।
हार्बर मास्टर लिन किंडलिन ने इसे अपने करियर के सबसे असामान्य और यादगार अभियानों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि रास्ता भटके व्हेलों के पूरे झुंड को सुरक्षित बाहर निकालना एक ऐसा अनुभव था, जिसकी उन्होंने अपने सेवाकाल में कभी कल्पना भी नहीं की थी।
