लंदन, रायटर। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को लंदन की कोर्ट ने दूसरी बार भी जमानत देने से मना कर दिया। ब्रिटिश कोर्ट ने कहा कि इस बात को मानने का पर्याप्त आधार है कि वह समर्पण नहीं करेगा। इसे अलावा कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि जालसाजी मामले में अत्यंत असामान्य तरीके से आरोपित ने गवाह को जान से मारने की धमकी दी है। पिछले सप्ताह ब्रिटेन के अधिकारियों ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ 13000 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी के आरोप में उसे गिरफ्तार किया था। भारत अब उसका प्रत्यर्पण कराने में जुटा है। हालांकि 48 वर्षीय भगोड़े कारोबारी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इन्कार किया है।

लंदन में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में जमानत के लिए दायर दूसरी अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। चीफ मजिस्ट्रेट एम्मा अबुथन ने कहा कि नीरव की लीगल टीम ने जमानत के लिए दस लाख पाउंड की सिक्यूरिटी की पेशकश की है। यहां तक कि अपने मुवक्किल की गतिविधि पर कठोर इलेक्ट्रानिक टैग प्रतिबंध पूरा करने की भी पेशकश की है। इसके साथ ही मजिस्ट्रेट ने कहा, 'जालसाजी के इस मामले में भारतीय बैंक (पीएनबी) को 13000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। मैं भरोसा नहीं कर पा रही हूं कि सशर्त जमानत से भारत सरकार की चिंताओं का समाधान हो पाएगा।'

जमानत मिली तो भाग सकता है
भारत सरकार की ओर से पेश सीपीएस ने नीरव की जमानत का पुरजोर विरोध किया। वकील टोबी कैडमैन ने कहा कि भगोड़े हीरा कारोबारी ने मनी लांड्रिंग से संबंधित गवाहों को जान से मारने की धमकी दी। उन्हें गवाही नहीं देने के लिए रिश्वत के रूप में 20 लाख रुपये देने की पेशकश भी की थी। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि पीएनबी घोटाले के मुख्य आरोपित के किसी अन्य देश भाग जाने की भी पूरी आशंका है। वह गवाहों और सुबूतों के साथ छेड़खानी भी कर सकता है।

नए आधार पर नई याचिका संभव
नीरव की हिरासत पर अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी। उस दिन भगोड़ा हीरा कारोबारी वीडियो लिंक से कोर्ट में पेश होगा। नीरव को इसी कोर्ट में तीसरी जमानत अर्जी दाखिल करने का मौका मिल सकता है। लेकिन यह केवल तभी संभव होगा जब जमानत अर्जी दाखिल करने का आधार पर्याप्त रूप से भिन्न हो। विकल्प के तौर पर उसका बचाव कर रही टीम हाई कोर्ट में भी जमानत याचिका दायर कर सकती है।

जांच अधिकारी के तबादले से मच गई थी सनसनी
नीरव मोदी मामले की जांच करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के संयुक्त निदेशक सत्यब्रत कुमार का तबादला रद कर दिया गया है। इससे पहले शुक्रवार को उनका तबादला तब कर दिया गया था, जब वह लंदन के वेस्टमिंस्टर कोर्ट में नीरव की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उपस्थित थे। इससे कुछ देर के लिए सनसनी मच गई।

ईडी के पश्चिमी जोन के शीर्ष अधिकारी विशेष निदेशक विनीत अग्रवाल ने शुक्रवार को उन्हें प्रभार से मुक्त करने का आदेश जारी किया था। उन्हें प्रतिनियुक्ति का कार्यकाल पूरा होने के आधार पर रिलीव किया गया था। इस खबर के सामने आते ही ईडी के निदेशक संजय कुमार मिश्रा ने दिल्ली में आदेश निरस्त कर दिया और कुमार का प्रभार यथावत कर दिया। विजय माल्या केस में भी जांच अधिकारी रह चुके कुमार भारतीय राजस्व सेवा के कस्टम एवं प्रत्यक्ष कर सेवा के अधिकारी हैं। अग्रवाल ने तकनीकी आधार पर उनसे प्रभार वापस लिया था।

उन्होंने इस नियम का हवाला भी दिया था कि कोई भी आइओ एक पद पर पांच साल से ज्यादा समय तक नहीं रह सकता है। उनके इस पद पर बने रहने के लिए ईडी मुख्यालय की ओर से कोई आदेश जारी नहीं किया गया था। विशेष निदेशक अग्रवाल के आदेश में हालांकि कुमार को कोल ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले की जांच जारी रखने को कहा गया था। इसका कारण यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें इस मामले में आइओ बनाया गया है और शीर्ष कोर्ट की अनुमति के बगैर इस मामले में किसी अधिकारी को नहीं बदला जा सकता है।

Posted By: Atyagi.jimmc