लंदन [ एजेंसी ]। वैज्ञानिकों की खोज ने जीवन को सरल बनाया है। इन अविष्‍कारों के चलते आज कई जटिल और गंभीर बीमारियां का बेहतरीन इलाज संभव और सुलभ हुआ है। इसी क्रम में वैज्ञानिकाें ने एक एेसे एप की खोज की है, जो बच्‍चों में पनप रहे अस्‍थमा के जाखिम को कम करेगा। यह एप पलक झपकते ही बच्‍चे के अंदर पनप रहे अस्‍थमा की सूचना देगा। इससे आप अस्‍थमा अटैक के खतरे से पहले से सजग हो सकते हैं। यह एप 'गूगल प्‍ले स्‍टोर' या 'एपल प्‍ले स्‍टोर' पर उपलब्‍ध है। अगर आप इस एप के लिए इच्‍छुक हैं तो आप 'गूगल प्‍ले स्‍टोर' या 'एपल प्‍ले स्‍टोर' पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं।

अस्‍थमा की सूचना देगा पीएआरएस (PARS) एप

वैज्ञानिकों ने इस एप का नाम पीएआरएस (PARS) रखा है। इस एप को अाप आसनी से अपने स्‍मार्टफोन में डाउनलोड कर सकते हैं। यह एप आपसे छह सवाल पूछेगा, जिसका उत्‍तर आपको हां या नहीं में देना है। आपके छह उत्‍तरों के बाद यह एप अस्‍थमा के बारे में आपका स्‍कोर बोर्ड तैयार करेगा। इस स्‍कोर बोर्ड से आप तय कर सकेंगे कि आप में अस्‍थमा है कि नहीं। ये सवाल मौसम, एक्जिमा और सांस में होने वाली खरखराहट से संबंधित होंगे। सवालों में माता-पिता की अस्‍थमा प्रोफाइल की जानकारी भी शामिल है। इन जानकारियों के बाद ये टूल आपको एक स्‍कोर कार्ड दिखाएगा।

इस स्‍कोर से यह तय होगा कि अस्‍थमा किस स्‍टेज में है। इससे यह भी ये सूचना मिलेगी कि सात वर्ष की उम्र में यह अस्‍थमा किस स्‍टेज में होगा। इस एप को साउथेम्प्टन अस्पताल और सिनसिनाटी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है। इस एप को विकसित करने वाले वैज्ञानिकों के दल में  साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर डॉ रमेश कुरुकुलार्ची भी शामिल हैं। इसकी खास बात यह है कि इसमें रक्त परीक्षण की जरूरत नहीं होती है। इसमें कम जोखिम के साथ बच्चों में अस्थमा के विकास की भविष्यवाणी करने की बेहतर क्षमता है।

स्‍कोर से तय होता है अस्‍थमा 

दरअसल, एप में पूछे गए छह सवाल ही आपके स्‍कोर का निर्धारण करते हैं। यानी इस स्‍कोर के आधार पर यह तय किया जाता है कि आपमें अस्‍थमा होने के कितने फीसद चांस हैं। शून्य के स्कोर वाले बच्चों को सात साल की उम्र से पहले अस्थमा होने की आंशका प्रबल होती है। इसी तरह से अगर कोई बच्‍चा सभी छह मानदंडों को पूरा करता है तो उसमें अस्‍थमा विकसित होने के 79 फीसद ज्‍यादा चांस रहते हैं। यदि छह जोखिमों में से दो को पूरा करते हैं उन्हें पांच का स्कोर दिया जाता है यानी अस्थमा के विकास का 15 फीसद चांस रहता है।

प्रत्‍येक दस सेकंड में 54 लाख मरीजों को अस्‍थमा का जानलेवा अटैक

दुनिया में अस्‍थमा के बड़े मरीज हैं। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में प्रत्‍येक दस सेकंड में 54 लाख मरीजों को अस्‍थमा का जानलेवा अटैक पड़ता है। इस अटैक के चलते प्रत्‍येक दिन तीन लोगों की मौत हो रही है। ब्रिटेन में हर 12 व्‍यवस्‍कों में एक अस्‍थमा की चपेट में है। इसी तरह से 11 बच्‍चों में से एक अस्‍थमा से प्रभावित है। अमेरिका में 13 में से एक व्‍यक्ति इसकी चपेट में है। इसी तरह से 12 बच्‍चों में से एक अस्‍थमा से प्रभावित है। यदि अस्‍थमा पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह आपके वायुमार्ग को प्रभावित करता है। लंबे समय तक इसकी चपेट में रहने से वायुमार्ग में सूजन आ जाती है। इससे श्वसन संबंधी कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

दरअसल, अस्‍थमा फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसके कारण व्यक्ति को श्वसन संबंधी कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। दमा सिर्फ युवाओं और व्यस्कों को ही नहीं, बल्कि बच्चों को भी अपनी चपेट में ले लेता है। अस्‍थमा के कई प्रकार के होता है। बच्चों और बड़ों में होने वाला अस्थमा एक ही प्रकार का होता है। आइए जाने दमा के तमाम प्रकारों के बारे में। सांस लेने में खरखराहट, छाती में दर्द रहना, निरंतर खासी आना अस्‍थमा के मूल लक्ष्‍ण हैं।

अस्‍थमा के प्रकार

1- एलर्जिक अस्थमा: एलर्जिक अस्थमा के दौरान आपको किसी चीज से एलर्जी हो सकती है। अमुमन कई लोगों को धूल-मिट्टी के संपर्क में आते ही दमा हो जाता है या फिर मौसम परिवर्तन के साथ ही दमा के शिकार हो जाते हैं।

2- नॉनएलर्जिक अस्थमा: इस तरह के अस्थमा का कारण किसी एक चीज का एक्सिक्ट्रीम पर जाने से ऐसा होता है। जब आप बहुत अधिक तनाव में हो या बहुत तेज-तेज हंस रहे हो, आपको बहुत अधिक सर्दी लग गई हो या बहुत अधिक खांसी-जुकाम हो। 

3- मिक्सड अस्थमा: इस प्रकार का अस्थमा किन्हीं भी कारणों से हो सकता है। कई बार ये अस्थमा एलर्जिक कारणों से तो है तो कई बार नॉन एलर्जिक कारणों से। इतना ही नहीं इस प्रकार के अस्थमा के होने के कारणों को पता लगाना भी थोड़ा मुश्किल होता है।

4- चाइल्ड ऑनसेट अस्थमा: ये अस्थमा का वो प्रकार है जो सिर्फ बच्चों को ही होता है। अस्‍थमैटिक बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है तो बच्चा इस प्रकार के अस्थमा से अपने आप ही बाहर आने लगता है। ये बहुत रिस्की नहीं होता लेकिन इसका सही समय पर उपचार जरूरी है।

5- एडल्ट ऑनसेट अस्थमा: ये अस्थमा युवाओं को होता है। यानी अकसर 20 वर्ष की उम्र के बाद ही ये अस्थमा होता है। इस प्रकार के अस्थमा के पीछे कई एलर्जिक कारण छुपे होते हैं। हालांकि, इसका मुख्य कारण प्रदूषण, प्लास्टिक, अधिक धूल मिट्टी और जानवरों के साथ रहने पर होता है।

6- एक्सरसाइज इनड्यूस अस्थमा: कई लोगों को एक्सरसाइज या फिर अधिक शारीरिक सक्रियता के कारण अस्थमा हो जाता है तो कई लोग जब अपनी क्षमता से अधिक काम करने लगते हैं तो वे अस्थमा के शिकार हो जाते हैं।

7- कफ वेरिएंट अस्थमा: कई बार अस्थमा का कारण कफ होता है। जब आपको लगातार कफ की शिकायत होती है या खांसी के दौरान अधिक कफ आता है तो आपको अस्थमा अटैक पड़ जाता है।

8- ऑक्यूपेशनल अस्थमा: इस प्रकार के अस्थमा का अटैक अचानक काम के दौरान पड़ता है। नियमित रूप से लगातार आप एक ही तरह का काम करते हैं तो अकसर आपको इस दौरान अस्थमा अटैक पड़ने लगते हैं या फिर आपको अपने कार्यस्थल का वातावरण सूट नहीं करता जिससे आप अस्थमा के शिकार हो जाते हैं।

9- नॉक्टेर्नल यानी नाइटटाइम अस्थमा: ये अस्थमा का ऐसा प्रकार है जो रात के समय ही होता है यानी जब आपको अकसर रात के समय अस्थमा का अटैक पड़ने लगे तो आपको समझना चाहिए कि आप नॉक्टेर्नल अस्थमा के शिकार हैं।

10- मिमिक अस्थमा: जब आपको कोई स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी कोई बीमारी जैसे निमोनिया, कार्डियक जैसी बीमारियां होती हैं तो आपको मिमिक अस्थमा हो सकता है। आमतौर पर मिमिक अस्थमा तबियत अधिक खराब होने पर  से चिकित्सकों को उस प्रश्न का उत्तर पहले से ज्यादा आत्मविश्वास के साथ जवाब देना चाहिए।

Posted By: Ramesh Mishra

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