लंदन, प्रेट्र। ग्लोबल वार्मिग के कारण शोधकर्ता अक्सर गर्मी बढ़ने, समुद्र के जल स्तर में वृद्धि जैसी चेतावनी देते रहते हैं। अब एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इसका असर अब जानवरों पर भी पड़ने लगा है। जंगली जानवर अब समय से पहले अपने बच्चों को जन्म देने लगे हैं। यह अध्ययन ब्रिटेन की एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी और ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर किया है।

आनुवांशिक परिवर्तनों से गुजर रहे हैं स्‍कॉटलैंड के लाल हिरण 

वन्य जीवों पर ग्लोबल वॉर्मिग के प्रभावों के अध्ययन से जुड़ी एक रिसर्च में कहा गया है कि हाल के वर्षों में स्कॉटलैंड के आइल ऑफ रम में मौजूद लाल हिरणों की आबादी आनुवांशिक परिवर्तनों से गुजर रही है, जिसके कारण इनके बच्चों के जन्म के समय में भी बदलाव आया है। इससे पहले हुए अध्ययनों में बताया गया था कि ग्लोबल वार्मिग के कारण 1980 के बाद से ही हिरण अपने बच्चों को समय से पूर्व ही जन्म दे रहे हैं।

जलवायु के अनुसार खुद को ढाल रहे जानवर 

हाल में हुए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया है कि हिरण जिस आनुवांशिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं, वह डार्विन के प्राकृतिक चयन के सिद्धांत के कारण होता है। यह सिद्धांत कहता है कि जैसी जलवायु होती है, जीव-जंतु भी ठीक उसी प्रकार खुद को ढाल लेते हैं। पीएलओएस बायोलॉजी नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि कैसे पिछले कुछ दशकों में ही इन जीवों का विकास इतनी तेजी से हो रहा है।

खुद को जलवायु के अनुकूल बना रही आबादी 

ऑस्ट्रेलियन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता और इस अध्ययन के सह-लेखक टिमोथी बोन्नेट ने कहा, 'अध्ययन के दौरान हमने पाया कि इन हिरणों की आबादी खुद को जलवायु के अनुकूल बना रही है। इनके बच्चों के जल्दी पैदा होने का एक कारण ग्लोबल वॉर्मिग भी है।' शोधकर्ताओं ने कहा, 'मादा हिरण हर साल समय से पहले एक बच्चे को जन्म देती है। इसलिए अपने पूरे जीवन का काल में वह ज्यादा बच्चों को जन्म देती है।'

जीन के बीच होता है जुड़ाव 

अध्ययन में कहा गया है कि दरअसल, यह आंशिक रूप से जीन के बीच एक जुड़ाव के कारण होता है जो हिरण के बच्चों को समय से पहले जन्म देता है। इसके कारण उनके प्रजनन की क्षमता भी प्रभावित होती है, जो समय के साथ-साथ हिरणों को जलवायु के अनुकूल बनाने में मदद करती हैं। शोधकर्ताओं ने कहा यह अध्ययन जलवायु परितर्वन के कारण वन्य जीवों पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में तो बताता ही है, साथ ही यह जलवायु संकट का एक ताजा उदाहरण भी है।

Posted By: Arun Kumar Singh

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