लंदन, प्रेट्र। दुनियाभर में महामारी बन चुके कोरोना वायरस (कोविड-19) के कारण स्वास्थ्य संबंधी दूसरी कई गंभीर समस्याओं का भी खतरा बढ़ गया है। अब एक नए अध्ययन में पाया गया है कि इस खतरनाक वायरस के संक्रमण के चलते पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसार्डर (पीटीएसडी) और डिलीरियम जैसी मानसिक समस्याएं भी खड़ी हो सकती हैं। डिप्रेशन (अवसाद) और व्यग्रता का भी खतरा पाया गया है। पीटीएसडी समस्या किसी भयावह घटना के कारण उत्पन्न होती है। इसमें पीड़ित व्यक्ति को बुरे सपने आते हैं। जबकि डिलीरियम से पीड़ित व्यक्ति उलझन में रहता है। उसे सोचने और समझने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

हर चौथा व्‍यक्ति डिलरियम की चपेट में 

लैंसेट मनोचिकित्सा पत्रिका में प्रकाशित शोध के अनुसार, यह निष्कर्ष कोरोना वायरस के चलते अस्पतालों में भर्ती होने वाले लोगों पर कम और लंबे समय तक किए गए अध्ययनों के आधार पर निकाला गया है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने पाया कि कोविड-19 के संक्रमण से अस्पताल में भर्ती होने वाला हर चौथा व्यक्ति बीमारी के दौरान डिलीरियम की चपेट में आ सकता है। इसके चलते अस्पताल में लंबे समय रहने या मौत का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि कोरोना से उबरने के बाद के प्रभाव अभी ज्ञात नहीं हैं।

कोरोना से हार्ट अटैक संबंधी हो सकती है समस्‍या 

 अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता जोनाथन रोगर्स ने कहा, 'हमारा विश्लेषण कोरोना संक्रमण की वजह से अस्पताल में भर्ती होने पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े खतरों पर केंद्रित रहा। हमने इस पर भी गौर किया कि क्या मानसिक समस्याएं बीमारी को गंभीर कर सकती हैं या लोगों के उबरने का समय लंबा खींच सकता है।' हालिया अध्ययनों में यह पाया जा चुका है कि कोरोना से हार्ट अटैक समेत हृदय संबंधी कई समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। ब्लड क्लाटिंग (रक्त का थक्का) का भी खतरा पाया जा चुका है। 

Posted By: Arun Kumar Singh

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