लंदन, आइएएनएस। कोरोना वायरस (कोविड-19) से इस समय तकरीबन पूरी दुनिया जूझ रही है। इसका बच्चों के तन और मन पर प्रतिकूल असर पाया जा रहा है। भारतवंशी समेत शोधकर्ताओं के एक दल का कहना है कि इस खतरनाक वायरस का बच्चों और कम उम्र के लोगों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ब्रिटेन की एक्सेटर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में कोरोना के पड़ने वाले संभावित प्रतिकूल प्रभाव की व्याख्या की है। 

शारीरिक और मानसिक सेहत पर पड़ रहा असर 

इस अध्ययन से जुड़े भारतवंशी डॉ. नील चंचलानी ने कहा, 'हमें पूर्वानुमान होना चाहिए कि स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच कम होने और महामारी की रोकथाम के उपायों के चलते उन्हें शारीरिक और मानसिक सेहत के साथ ही सामाजिक मोर्चे पर भी अप्रत्यक्ष रुप से प्रतिकूल प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है।'

मोबाइल फोन और टीवी की ओर झुकाव बढ़ा 

कनाडाई मेडिकल एसोसिएशन जर्नल (सीएमएजे) में छपे अध्ययन में बताया गया है कि सामाजिक जुड़ाव और नियमित दिनचर्या के अभाव में बच्चों का मोबाइल फोन और टीवी की ओर झुकाव बढ़ सकता है। साथ ही शारीरिक गतिविधि में कमी भी आ सकती है। इसके चलते एकाग्रता में गिरावट के साथ ही डिप्रेशन (अवसाद) और एंग्जाइटी (व्यग्रता) का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में बच्चों का खास ध्यान रखने की जरूरत है। 

डिप्रेशन और एंग्जाइटी जैसी मानसिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा बच्‍चों को 

इस माह के प्रारंभ में आए एक अन्य अध्ययन में यह कहा गया था कि कोरोना की रोकथाम के लिए लगभग पूरी दुनिया में लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं। इनका बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत पर गहरा असर पड़ सकता है। इन्हें डिप्रेशन और एंग्जाइटी जैसी मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

Edited By: Arun Kumar Singh