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मर चुके तारे की राख से जन्मा दूसरी पीढ़ी का ग्रह, वैज्ञानिकों ने की नई खोज

Published: Wed, 07 Oct 2026 10:09 AM (IST)

यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के खगोलविदों ने एक दुर्लभ दूसरी पीढ़ी के ग्रह की खोज की है, जो एक मृत तारे ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

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HighLights

  1. यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक ने दुर्लभ दूसरी पीढ़ी के ग्रह की खोज की।

  2. यह ग्रह मृत तारे (व्हाइट ड्वार्फ) की राख से निर्मित है।

  3. खोज से ब्रह्मांड में ग्रह निर्माण के नए रास्ते खुले हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के खगोलविदों की एक टीम ने एक दुर्लभ दूसरी पीढ़ी के ग्रह की खोज की है। यह ग्रह उस मरे हुए तारे (एक सुलगते हुए व्हाइट ड्वार्फ) की राख के चारों ओर घूम रहा है, जिससे यह पैदा हुआ था।

व्हाइट ड्वार्फ मरे हुए तारों के वे बचे हुए कोर (केंद्र) होते हैं जो तब बनते हैं जब तारे का ईंधन खत्म हो जाता है। वे अपने आस-पास के ग्रहों से पदार्थ को अपनी ओर खींचने के लिए जाने जाते हैं, जिसका पता उनके वायुमंडल में लगाया जा सकता है। यह केमिकल सिग्नेचर खगोलविदों को कक्षा में मौजूद ग्रहों के बारे में जानकारी दे सकता है और इस सिग्नल में आमतौर पर सिलिकॉन और आयरन जैसे चट्टान बनाने वाले तत्वों की प्रधानता होती है।

शोधकर्ताओं का क्या कहना है?

हालांकि पल्सर के आस-पास ऐसी 'रीबॉर्न' (फिर से बनी) दुनियाओं के होने का शक जताया जाता रहा है, लेकिन हालिया खोज से पता चलता है कि व्हाइट ड्वार्फ के आस-पास भी ग्रहों की दूसरी पीढ़ी बन सकती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के फिजिक्स डिपार्टमेंट में पीएचडी स्टूडेंट और इस स्टडी की मुख्य लेखिका जेमी विलियम्स ने कहा, "दूसरी पीढ़ी के ग्रह उस मटीरियल से बनते हैं जिसे कोई तारा मरते समय बाहर निकालता है। ये बहुत कम मिलते हैं और एक सफेद बौने तारे के आस-पास ऐसा ग्रह मिलना बिल्कुल भी उम्मीद के मुताबिक नहीं था। यह कुछ-कुछ ऐसा है जैसे कोई ग्रह उसी तारे की राख से बना हो जिसके चारों ओर वह कभी घूमता था।"

किस बात फोकस करती है स्टडी?

नेचर एस्ट्रोनॉमी में पब्लिश हुई और यूरोपियन रिसर्च काउंसिल (ERC) से फंडेड यह स्टडी व्हाइट ड्वार्फ HS 0209+0832 पर फोकस करती है, जिसके एटमॉस्फियर में एक अजीब केमिकल सिग्नेचर है। इसमें जिंक, कॉपर और नियोबियम जैसे असामान्य रूप से भारी तत्व पाए गए हैं, जिनकी मात्रा सूरज की तुलना में 1,000 गुना से भी ज्यादा है।

ये सभी तत्व किसी तारे के खत्म होने के दौरान बने हैं और खास बात यह है कि पहली बार किसी व्हाइट ड्वार्फ में नियोबियम मिला है। नासा के टेस सैटेलाइट से मिले डेटा ने और सबूत दिए। रिसर्चर्स ने सीधे उस ग्रह से हल्की, रेगुलर चमक का सिग्नल देखा जो हर 4.4 दिन में दोहराया जा रहा था। यह सिग्नल बृहस्पति के आकार के गैस वाले विशाल ग्रह जैसा है जो एक तंग कक्षा में टाइडली लॉक है।

व्हाइट ड्वार्फ के इतने करीब होने के कारण उम्मीद है कि तेज रेडिएशन की वजह से ग्रह का बाहरी वायुमंडल उबलकर खत्म हो रहा होगा। इससे निकलने वाला पदार्थ व्हाइट ड्वार्फ की सतह पर गिरता है और एक अनोखा केमिकल सिग्नल बनाता है।

'नई दुनिया को दिया जन्म'

यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के फिजिक्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर बोरिस गैंसिक ने कहा, "HS 0209+0832 के आस-पास मौजूद ग्रह के बारे में सबसे खास बात यह है कि यह कहीं और से आया हुआ ग्रह नहीं है और न ही यह उस सिस्टम के जन्म के समय से बचा हुआ कोई ग्रह है। ऐसा लगता है कि यह उसी मटीरियल से बना है जिसे इसके तारे ने मरते समय बाहर निकाला था। एक तरह से इस सिस्टम ने पुराने सिस्टम की नींव का इस्तेमाल करके एक नई दुनिया को जन्म दिया है।"

अगर इसकी पुष्टि हो जाती है तो HS 0209+0832 ऐसा पहला सफेद बौना तारा होगा जिसमें दूसरी पीढ़ी का ग्रह मिला है। इससे इसी तरह की नई बनी दुनियाओं को खोजने का एक नया रास्ता खुलता है।

विस्कॉन्सिन-मैडिसन यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोनॉमी डिपार्टमेंट के डॉ. निकोलस स्टोन ने कहा, "एलिमेंट्स का यह पैटर्न एस-प्रोसेस का साफ संकेत है। यह एक न्यूक्लियर रिएक्शन है जो मरते हुए तारों के रेड जाइंट फेज (जब वे फूलकर बड़े हो जाते हैं) के दौरान भारी एलिमेंट्स बनाता है। यह एक ऐसा केमिकल सिग्नेचर है जो किसी आम, पहली पीढ़ी के ग्रह में नहीं होना चाहिए, जिससे हमें पता चला कि यह नया ग्रह कुछ अलग था।"

टीम का मानना है कि सबसे संभावित वजह यह है कि व्हाइट ड्वार्फ, HS 0209+0832 हाल ही में बने दूसरी पीढ़ी के एक विशाल ग्रह से ऊर्जा ले रहा है। यह ग्रह तारे के खत्म होने के दौरान बने मटीरियल की एक नई डिस्क से बना था।

क्योंकि वह डिस्क तारे से ही निकले मटीरियल से बनी थी, इसलिए उसमें स्वाभाविक रूप से वे असामान्य भारी तत्व ज्यादा मात्रा में होंगे जो अब व्हाइट ड्वार्फ के वायुमंडल में दिखाई दे रहे हैं।

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