'रेलवे और इंटरनेट के दौर से कई गुना ज्यादा पैसा एआई में खर्च कर रहे देश', कंसल्टिंग कंपनी पीडब्ल्यूसी का दावा
एआई में निवेश रेलवे और इंटरनेट जैसी पिछली तकनीकी क्रांतियों से कहीं अधिक है, जिसमें 2050 तक डेटा सेंटर्स पर 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक खर्च होने का अनुमान है।

रेलवे और इंटरनेट के दौर से कई गुना ज्यादा पैसा एआई में खर्च कर रहे देश।
HighLights
एआई में निवेश पिछली तकनीकी क्रांतियों से कहीं अधिक है।
2050 तक डेटा सेंटर्स पर 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक खर्च।
अर्थशास्त्री भारी खर्च के बावजूद उत्पादकता लाभ पर चिंतित हैं।
डिजिटल डेस्क, लंदन। किसी भी नई टेक्नोलॉजी में इतना पैसा कभी नहीं लगा, जितना एआई में लग रहा है। यह उन रकमों से कहीं अधिक है, जो रेलवे या इंटरनेट जैसी टेक्नोलॉजी क्रांतियों के समय उनमें लगाई गई थीं।
कंसल्टिंग कंपनी पीडब्ल्यूसी के अनुमान के मुताबिक, 2050 तक सिर्फ डेटा सेंटर्स पर कुल खर्च 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकता है, जो लगभग बकाया यूएस ट्रेजरीज की वैल्यू के बराबर है। महंगाई को ध्यान में रखने के बाद भी, यह खर्च रेलवे या डॉट-कॉम बूम के दौरान हुए खर्च के मुकाबले बहुत ज्यादा है।
एआई की दौड़ में शामिल प्रमुख कंपनियों में से एक, एंथ्रोपिक आने वाले वर्षों में 518 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रही है। यह रकम उसके 2025 के अनुमानित रेवेन्यू से 100 गुना से भी अधिक है।
कंपनी को सपोर्ट करने वालों का कहना है कि एआई टेक्नोलॉजी, भाप इंजन के आने और उससे शुरू हुए औद्योगीकरण से भी कहीं अधिक क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।
हालांकि, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि एआई कंपनियों के जबरदस्त अनुमानों, भारी-भरकम खर्च और आसमान छूती वैल्यूएशन के पीछे बड़े पैमाने पर प्रोडक्टिविटी बढ़ने और भविष्य में मुनाफे की उम्मीदें छिपी हैं, लेकिन अभी तक इसका कोई ठोस सबूत या पहले का कोई उदाहरण नहीं है कि वे ऐसा कर पाएंगी।
कई चिंताओं के बाद भी एआई कंपनियों के प्रमुख आने वाले बदलावों के बारे में बहुत अधिक उत्साहित हैं। एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई ने कहा कि एआई वाला भविष्य बेहद शानदार और खूबसूरत हो सकता है।
ओपनएआई के सैम आल्टमैन का कहना है कि नई-नई अद्भुत चीजें हासिल करने की रफ्तार बहुत तेज होगी, क्योंकि मॉडल खुद को बेहतर बनाना और नई खोजों की गति बढ़ाना सीख रहे हैं।
(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)
