न्यूयॉर्क, एजेंसी। शुक्रवार को प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी पर न्यूयॉर्क में जानलेवा हमले के बाद वह अस्पताल में भर्ती है। इस घटना के बाद से रुश्दी के कुछ हफ्ते पहले दिए एक इंटरव्यू की खूब चर्चा हो रही है। जर्मन मैगजीन को दिए इस इंटरव्यू में सलमान रुश्दी ने कहा था कि वह पहले की अपेक्षा में अब सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं। रुश्दी ने कहा कि जान को खतरा होने के कारण वे सालों से छिपने को मजबूर थे। मगर अब उनकी जिंदगी अपेक्षाकृत सामान्य हुई है।

अपने खिलाफ फतवे का जिक्र किया

बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखक सलमान रुश्दी ने दो हफ्ते पहले जर्मन के स्टर्न मैगजीन को दिए इंटरव्यू में यह बाते कहीं थी। रुश्दी का यह इंटरव्यू 18 अगस्त को प्रकाशित होने वाला था। मगर हमले के बाद इसे शनिवार को जारी कर दिया गया। सलमान रुश्दी ने खुद को एक आशावादी व्यक्ति भी बताया। उन्होंने अपने खिलाफ जारी फतवे का जिक्र करते हुए बताया कि 1989 में ईरान ने उनके खिलाफ फतवा किया था और दुनिया भर के मुसलमानों को ईशनिंदा की बेअदबी के आरोप में उन्हें मारने का आह्वान किया गया था।

रुश्दी ने अपने ताजा इंटरव्यू में संयुक्त राज्य में लोकतंत्र प्रणाली को मिल रही चुनोतियों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि ये नस्लवाद और उदारवाद की उपलब्धियों के प्रति घृणा से प्रेरित थे और फासीवाद के एक प्रारंभिक चरण का गठन किया है। रुश्दी ने साल 2020 में चुनाव जीतने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प के झूठे दावे पर भी चर्चा की और कहा कि लोगों ने उन पर भरोसा कर लिया।

एक दशक तक छिपते रहे रुश्दी

ईरान की इस्लामिक क्रांति के धार्मिक नेता अयातुल्लाह रूहोल्लाह खोमैनी ने 1989 में रुश्दी की किताब "द सैटेनिक वर्सेज" पर पैगंबर की बेअदबी का आरोप लगाकर फतवा जारी किया था। इसके बाद करीब एक दशक तक सलमान रश्दे ने दुनिया से छिपते रहे। मगर हाल के वर्षों में अपेक्षाकृत खुले तौर पर नजर आए। भारतीय के मुबंई में जन्में सलमान रुश्दी साल 2016 में अमेरिकी नागरिकता प्राप्त होने के बाद से न्यूयॉर्क शहर में रह रहे हैं। शुक्रवार को एक कार्यक्रम में उनपर एक शख्स ने चाकू से हमला कर दिया, जिसके बाद से उनका उपचार जारी है।

Edited By: Aditi Choudhary