रूस ने यूक्रेनी सैनिकों के खिलाफ यौन हिंसा को बनाया सुनियोजित हथियार, WSJ की रिपोर्ट में दावा
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी सेना ने यूक्रेनी पुरुषों के खिलाफ यौन हिंसा को युद्ध के एक सुनियोजित हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है।

यूक्रेनी सैनिकों के खिलाफ यौन हिंसा। (फाइल)
HighLights
रूसी सेना ने यूक्रेनी पुरुषों के खिलाफ यौन हिंसा को हथियार बनाया।
WSJ रिपोर्ट: यौन उत्पीड़न रूस की सुनियोजित सैन्य रणनीति का हिस्सा।
UN ने 310 मामलों में बयान लिए, जिनमें 280 पुरुष पीड़ित।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। रूसी सेना ने यूक्रेनी पुरुषों के खिलाफ यौन हिंसा को युद्ध के एक सुनियोजित हथियार के तौर इस्तेमाल किया है। यह दावा वॉल स्ट्रीट जर्नल में किया गया है।
यूक्रेनी अभियोजकों, सयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं और युद्ध के दौरान बंदी बनाए गए लोगों के बयानों पर आधारित रिपोर्ट में पाया गया कि 2022 में बड़े पैमाने पर हमले की शुरुआत के बाद से ही यूक्रेनी सैनिकों और आम नागरिकों का यौन उत्पीड़न रूस की एक मुख्य रणनीति बन गई है।
मुझे मानसिक रूप से तोड़ना चाहते थे- सेरही बॉयचुक
मोर्चे पर जाने से पहले, सेरही बॉयचुक ने अपनी पत्नी से कहा था कि वह जिंदा पकड़े नहीं जाना चाहते। WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ महीनों बाद रूसी गार्डों ने उन्हें दो साल से ज्यादा समय तक बंदी बनाकर रखा।
उन्होंने बोतलों और डंडों से उनका बलात्कार किया और उनके गुप्तांगों पर चाकू सटाया। बॉयचुक ने कहा कि वे मुझे मानसिक रूप से तोड़ना चाहते थे।
सुनियोजित उत्पीड़न
संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध के दौरान रूसी सेना द्वारा कथित यौन हिंसा के लगभग 310 मामलों में बयान लिए हैं। बताई गई हिंसा में बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, गुप्तांगों को नुकसान पहुंचाना, बिजली के झटके देना और गुप्तांगों पर मार-पीट करना शामिल है। पीड़ितों में 280 पुरुष, 26 महिलाएं और चार लड़कियां शामिल थीं।
यूक्रेनी अभियोजकों ने 'जर्नल' को बताया कि उत्पीड़न के तरीकों से पता चलता है कि ये अपराध केवल कुछ लोगों द्वारा की गई हरकतें नहीं थीं, बल्कि रूस के सैन्य अभियान का ही एक हिस्सा थे।
बोस्निया में युद्ध अपराधों की जांच करने वाले पूर्व अंतरराष्ट्रीय अभियोजक डेविड श्वेंडिमैन ने कहा कि ऐसी स्थितियों में कमांड में मौजूद कोई व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता कि उसे पता नहीं था कि क्या हो रहा है, भले ही उन्होंने अपने मातहतों को ऐसे करने का आदेश न दिया हो।
कैदियों को दिए गए बिजली के झटके- रिपोर्ट
यातना के एक आम तीरीके में, गार्ड कैदियों के गुप्तांगों से सेना के पुराने फील्ड टेलीफोन के तार जोड़ देते थे और उन्हें बिजली के झटके देते थे। संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि जेल के गार्ड इसे पुतिन को कॉल कहते हैं।
WSJ से बात करने वाले जेल के पूर्व अधिकारियों के मुताबिक, सेंट पीटर्सबर्ग में जेल के मुख्य अधिकारी यूक्रेनी युद्धबंदियों की देखरेख करने वाले गार्डों के से कहा जाता था कि हिंसा पर कोई रोक नहीं है, जिसमें अक्सर यौन उत्पीड़न भी शामिल था।
आम नागरिक भी बने यौन हिंसा के शिकार- रिपोर्ट
आम नागरिक भी इसका शिकार बने हैं। खेरसॉन के ओलेक्सी सिवक को यूक्रेनी झंडा लगाने के बाद जेल में डाल दिया गया था। गार्डों ने उनके गुप्तांगों से तार जोड़कर उन्हें बिजली के झटके दिए। अब सिवर लगभग 200 ऐसे यूक्रेनी पुरुषों के लिए एक सपोर्ट ग्रुप चलाते हैं, जिनका आरोप है कि रूस ने उन्हें प्रताड़ित किया।
यूक्रेनी जांचकर्ताओं का कहना है कि रूस के अंदर नौ अलग-अलग कैंपों में शोषण हुआ है, जिनमें से सात का बर्ताव बहुत ही क्रूर था। WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रेमलिन और रूस की फेडरल प्रिजन सर्विस ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
