फिर एक्शन में रूस के 70 साल पुराना Tu-95 बॉम्बर, अलास्का के पास गश्त से अमेरिका को संदेश
रूस ने अपने शीत युद्धकालीन Tu-95MS रणनीतिक बॉम्बर को अलास्का के पास बेरिंग और चुकरी सागर के ऊपर गश्त पर भेजा है।

एक्शन में रूस के 70 साल पुराना Tu-95 बॉम्बर।
HighLights
रूस ने अलास्का के पास Tu-95MS बॉम्बर से गश्त की।
यह शीत युद्धकालीन विमान आज भी रणनीतिक रूप से प्रासंगिक है।
गश्त से रूस की लंबी दूरी की सैन्य क्षमता प्रदर्शित हुई।
डिजिटल डेस्क, मॉस्को। रूस ने अपने कोल्ड वॉर के दौरे के Tu-95MS स्ट्रैटेजिक बॉम्बर, जिन्हें नाटो (NATO) की कोडिंग में 'बियर' कहा जाता है, को अलास्का के पास गश्त पर भेजा है। इससे पता चलता है कि दशकों पुराने ये जहाज आज भी रूस के लंबी दूरी के सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
रॉयटर्स के अनुसार, रूसी समाचार एजेंसी RIA ने सोमवार को रक्षा मंत्रालय के हवाले से बताया कि इन बॉम्बर विमानों ने रूस के सुदूर पूर्व में बेरिंग और चुकरी सागर के ऊपर एक तय गश्त पूरी की है।
बेरिंग और चुकरी सागर अलास्का के काफी करीब हैं, जिसका मतलब है कि यह गश्त रूस और अमेरिका के बीच एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके में हुई है। यह क्षेत्र उत्तरी प्रशांत महासागर को आर्कटिक से जोड़ता है और दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों के लिए बहुत अहम है।
रूस के लिए, इस तरह की गश्त यह दिखाती है कि वह उत्तरी अमेरिका के करीब भी अपने लंबी दूरी के स्ट्रैटेजिक बॉम्बर तैनात कर सकता है। साथ ही, इससे चालक दल को महत्वपूर्ण समुद्री इलाकों के ऊपर लंबी उड़नें भरने का अभ्यास भी मिल जाता है।
लेकिन सवाल यह है कि रूस आज भी सात दशक पुराने डिजाइन वाले बॉम्बर का इस्तेमाल क्यों कर रहा है और आखिर Tu-95MS आज के आधुनिक युद्ध में प्रासंगिक है?
रूस आज भी 70 साल पुराने बॉम्बर पर क्यों निर्भर है?
12 नवंबर 1952 को पहली बार उड़ान भरने वाला 'तुपोलेव Tu-95', सोवियत संघ द्वारा शीत युद्ध के दौरान विकसित किया गया था। यह एक लंबी दूरी का स्ट्रैटेजिक बॉम्बर है, जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।
बाद में इसका Tu-95MS वर्जन आया, जिसने 1979 में पहली बार उड़ान भरी। इसे लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें ले जाने के लिए डिजाइन किया गया था, जिससे यह विमान एक 'स्टैंडऑफ वेपन प्लेटफॉर्म' बन गया। 'यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन' (UAC) के अनुसार, Tu-95 सीरीज के 500 से ज्यादा विमान बनाए गए थे।
शीत युद्ध के दौरान निभाई अहम भूमिका
शीत युद्ध के दौरान, Tu-95 सीरीज के विमानों ने सोवियत संघ की लंबी दूरी की वायु सेना में अहम भूमिका निभाई। इन्होंने आर्कटिक, अटलांटिक और प्रशांत महासागर के ऊपर रणनीतिक प्रशिक्षण मिशन, जासूसी उड़ानें और गश्त जैसे कई काम किए।
1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद, रूस ने इन विमानों को अपने स्ट्रैटेजिक एयर फ्लीट का हिस्सा बनाए रखा। रूसी Tu-95MS बॉम्बर्स का इस्तेमाल नवंबर 2015 में सीरिया में हुआ था, जहां मॉस्को के सैन्य अभियान के दौरान उन्होंने लक्ष्यों पर क्रूज मिसाइलें दागी थीं।
इसके अलावा, फरवरी 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से, यूक्रेन में लक्ष्यों के खिलाफ लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें दागने के लिए भी इनका उपयोग किया गया है।
Tu-95MS की खासियत
Tu-95MS में चार कुजनेत्सोव NK-12MP टर्बोप्रॉप इंजन लगे हैं। इनमें से प्रत्येक इंजन लगभग 15,000 हॉर्सपावर उत्पन्न करता है और विपरीत दिशाओं में घूमने वाले प्रोपेलर्स को चलाता है।
रोस्टेक के अनुसार, यह विमान लगभग 890 किमी/घंटा की अधिकतम गति तक पहुंच सकता है, जो इसे टर्बोप्रॉप इंजन वाले विमानों में सबसे तेज बनाता है। हथियारों के भार और मिशन की प्रकृति के आधार पर, इसकी रेंज 6,500 से 10,500 किमी तक हो सकती है। यह क्षमता इसे आर्कटिक और प्रशांत महासागर के ऊपर लंबी दूरी की गश्त करने के लिए जरूरी सहनशक्ति प्रदान करती है।
Tu-95MS की अधिकतम हथियार ले जाने की क्षमता लगभग 15,000 किलोग्राम है। इसके अलग-अलग वेरिएंट के आधार पर, हथियारों को विमान के मुख्य ढांचे के अंदर बने 'वेपन बे' में या फिर पंखों के नीचे लगे 'पायलॉन' पर बाहर की तरफ ले जाया जा सकता है।
आधुनिक युद्ध में Tu-95MS आज भी क्यों प्रासंगिक है?
भले ही इसका डिजाइन 1952 में पहली बार उड़ान भरने वाले विमान पर आधारित है, फिर भी Tu-95MS आज भी प्रासंगिक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि रूस इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल लॉन्च करने वाले प्लेटफॉर्म के तौर पर करता है, न कि ऐसे बॉम्बर के रूप में जिसे अपने लक्ष्य के ठीक ऊपर से उड़ान भरनी पड़े।
यह विमान Kh-101 जैसे हथियारों को काफी दूर से ही लॉन्च कर सकता है, जिससे इसे सबसे ज्यादा सुरक्षित हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए बिना ही अपने लक्ष्यों पर हमला करने की सुविधा मिलती है।
अलास्का के पास इसकी लगातार गश्त एक तरह का संकेत भी देती है कि रूस आज भी बहुत लंबी दूरी तक अपने रणनीतिक विमान तैनात कर सकता है। आज इसकी अहमियत इसके एयरफ्रेम की पुरानी उम्र से नहीं, बल्कि उन लंबी दूरी के हथियारों से है जिन्हें यह अपने साथ ले जा सकता है और लॉन्च कर सकता है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
