मास्‍को, एजेंसी। रूस ने कहा है कि देश के सभी अस्‍पतालों में 11 जून से कोरोना मरीजों को जापान की एविफवीर नाम से पंजीकृति एंटीवायरल ड्रग दिया जाएगा। हालांकि, रूस अगले सप्‍ताह कोरोना रोगियों के इलाज हेतु अनुमोदित दवा देना शुरू कर देगा। यह उम्‍मीद की जा रही है कि इससे देश की स्‍वास्‍थ्‍य प्रणाली पर दबाव कम होगा। इसके साथ देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्‍या में कमी आएगी। रूस के आरडीआईएफ सॉवरेन वेल्थ फंड के प्रमुख ने एक साक्षात्कार में रॉयटर्स को बताया कि एक महीने में लगभग 60,000 लोगों के इलाज के लिए दवा का निर्माण किया जाएगा। अब यह देखना दिलचस्‍प होगा कि यह दवा कोरोना रोगियों के लिए कितनी कारगर होगी। बता दे कि रूस ने जापानी दवा के संशोधित संस्करण को अनुमति दी है। हालांकि, जापान ने अभी तक इस दवा के उपयोग की स्‍वीकृत नहीं दी है। 

रेमेड्सविर से रूस की उम्‍मीदें, दुनिया में कई मुल्‍क कर रहे हैं प्रयोग 

बता दें कि मौजूदा समय में दुनिया में कोरोना वायरस के लिए कोई टीका नहीं है। हालांकि, पूरी दुनिया कोरोना वायरस की वैक्‍सीन की खोज में जुटी है, लेकिन इन दवाओं का मानव परीक्षणों में अभी तक कोई असर नहीं दिखा है। वैक्‍सीन का मानव परीक्षण के परिणाम उत्‍साहजनक नहीं रहे। ऐसे में गिलीड की एक नई एंटीवायरल दवा जिसे रेमेड्सविर कहा जाता है, काफी उम्‍मीदें हैं। यह दावा किया जा रहा है कि दवा के परीक्षण के दौरान कोरोना संक्रमण को रोकने के सीमित प्रभाव दिखे हैं। दुनिया के कई मुल्‍कों में कोरोना मरीजों को यह दवा दी जा रही है। 

330 लोगों पर किया गया ​परीक्षण सफल रहा

दिमित्रिज ने कहा कि इस दवा का 330 लोगों पर किया गया ​परीक्षण सफल रहा है। चार दिनों के भीतर कोरोना मरीजों को ठीक कर लिया गया। यह परीक्षण लगभग एक सप्‍ताह में समाप्‍त होने वाला था कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक विशेष त्वरित प्रक्रिया के तहत दवा के उपयोग के लिए अपनी मंजूरी दे दी। उन्‍होंने कहा कि प्रभावोत्पादक दवाओं का परीक्षण करने के लिए आमतौर पर कई महीने का समय लग जाता है। दिमित्रिज ने कहा कि रूस परीक्षण समय में कटौती करने में सक्षम था, क्योंकि जापानी जेनेरिक दवा जो एविफवीर पर आधारित है, वह पहली बार 2014 में पंजीकृत हुई थी। रूसी विशेषज्ञों द्वारा इसे संशोधित करने से पहले महत्वपूर्ण परीक्षण किया गया था।

रेमेड्सविर से रूस की उम्‍मीदें, दुनिया में कई मुल्‍क कर रहे हैं प्रयोग 

बता दें कि मौजूदा समय में दुनिया में कोरोना वायरस के लिए कोई टीका नहीं है। हालांकि, पूरी दुनिया कोरोना वायरस की वैक्‍सीन की खोज में जुटी है, लेकिन इन दवाओं का मानव परीक्षणों में अभी तक कोई असर नहीं दिखा है। वैक्‍सीन का मानव परीक्षण के परिणाम उत्‍साहजनक नहीं रहे। ऐसे में गिलीड की एक नई एंटीवायरल दवा जिसे रेमेड्सविर कहा जाता है, काफी उम्‍मीदें हैं। यह दवा किया जा रहा है कि दवा के परीक्षण के दौरान कोरोना संक्रमण को रोकने के सीमित प्रभाव दिखे हैं। दुनिया के कई मुल्‍कों में कोरोना मरीजों को यह दवा दी जा रही है।

    

 

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