26 साल से सत्ता के केंद्र में पुतिन, फिर रूस में क्यों होते हैं चुनाव? समझिए मॉस्को की राजनीति का पूरा गणित
रूस में व्लादिमीर पुतिन की 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी ने एक बार फिर चुनाव में बहुमत हासिल किया है, जिससे पुतिन का राष्ट्रपति बने रहना तय है।

रूस के चुनाव में फिर एक बार पुतिन की पार्टी को बहुमत (फोटो-रॉयटर्स)
HighLights
व्लादिमीर पुतिन की 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी ने फिर चुनाव जीता।
पार्टी को 57.83% वोट मिले, संवैधानिक बहुमत बरकरार।
यूक्रेन युद्ध के बाद यह पहला संसदीय चुनाव था।
डिजिटल डेस्क, मॉस्को। रूस में चुनाव प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। व्लादिमीर पुतिन की पार्टी 'यूनाइटेड रशिया' ने फिर एक बार जीत हासिल की है। पुतिन ही रूस के राष्ट्रपति बने रहेंगे।
रूस में चुनाव से पहले भी ये बात साफ तौर पर नजर आ रही थी कि पुतिन की पार्टी ही चुनाव जीतने वाली है, लेकिन फिर भी रूस में लोग वोट डालने गए, वोटों की गिनती हुई और फैसला रूसी राष्ट्रपति पुतिन के पक्ष में आया।
रूस में हुए चुनाव के नतीजों में कोई हैरानी की बात नहीं थी। इन सभी बातों के साथ ही ये सवाल सामने आता है कि फिर आखिर रूस में चुनाव की क्या जरूरत है, जबकि वहां की व्यवस्था में सत्ता में असली बदलाव की संभावना बहुत कम होती है? आइए ऐसे ही सवालों के जवाब जानते हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भी पुतिन की पार्टी को बहुमत
रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार, 95% से ज्यादा वोटों की गिनती के बाद पुतिन की सत्ताधारी 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी को 57.83% वोट मिले। इस नतीजे से 'यूनाइटेड रशिया' को स्टेट ड्यूमा की 450 में से 355 सीटें मिलीं, जिससे उसका संवैधानिक बहुमत बना रहा।
2021 के पिछले संसदीय चुनाव में पार्टी को आधिकारिक तौर पर 49.8% वोट मिले थे। रूस में इस बार का चुनाव 2022 में यूक्रेन पर रूस के बड़े हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव भी था। पुतिन ने इसे अपनी नीतियों और युद्ध के लिए समर्थन की परीक्षा के तौर पर पेश किया था।
क्रेमलिन ने कहा कि 2022 में यूक्रेन में सेना भेजने के बाद हुए इस पहले संसदीय चुनाव से पता चला कि रूसी लोग पुतिन के साथ एकजुट हैं, जो 1999 की न्यू ईयर ईव से सत्ता में हैं।
रूसी वोट का असल में क्या कोई महत्व है?
रूस में चुनाव को लेकर यह कहना बहुत गलत होगा कि किसी एक व्यक्ति का वोट पूरी तरह बेकार है, वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि सत्ताधारी पार्टी की जीत तय मानी जाती है।
औपचारिक रूप से, रूस में एक व्यक्ति का वोट ड्यूमा (रूसी संसद) के गठन पर दो तरह से असर डाल सकता है। 450 सीटों में से आधी सीटें देश भर में पार्टी-लिस्ट आनुपातिक प्रतिनिधित्व (proportional representation) के जरिए बांटी जाती हैं, जिसमें 5% वोट पाने की शर्त होती है।
वहीं बाकी 225 सीटें सिंगल-मेंबर निर्वाचन क्षेत्रों (constituencies) से चुनी जाती हैं। इन दोनों तरीकों में एक वोट का महत्व अलग-अलग होता है।
विदेश मामलों के जानकार रॉबिंदर सचदेव ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में बताया, 'पार्टी-लिस्ट मुकाबले में, एक वोट राष्ट्रीय कुल का बहुत छोटा हिस्सा होता है, हालांकि सामूहिक रूप से ये वोट 225 सीटों का फैसला करते हैं और तब खास तौर पर अहम हो सकते हैं जब कोई पार्टी 5% की सीमा के करीब हो।'
एक्सपर्ट ने आगे कहा, 'हालांकि, कड़े मुकाबले वाले निर्वाचन क्षेत्र में, वोटों की अपेक्षाकृत कम संख्या सीधे तौर पर यह तय कर सकती है कि वह सीट कौन जीतेगा।'
यह भी पढ़ें- ट्रंप-पुतिन की जल्द मुलाकात संभव? अमेरिका ने रूसी राष्ट्रपति को G20 सम्मेलन का दिया न्योता
