नई दिल्‍ली, जागरण स्‍पेशल। वैश्विक पुलिस संस्‍था इंटरपोल एक बार फिर से सुर्खियों में है। एक बार फिर यह अपने प्रमुख को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है। इसके प्रमुख के तौर पर दक्षिण कोरिया के किम जोंग यांग ने रूस के प्रत्‍याशी एलेक्‍जेंडर प्रोकोप्‍चक को मात देते हुए सीट पर कब्‍जा कर लिया है। उनका चुनाव इस संस्‍था के 192 सदस्‍य देशों द्वारा की गई वोटिंग के बाद हुआ है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि उत्तर कोरिया इस संस्‍था का हिस्‍सा नहीं है। यह चुनाव दुबई में किया गया। चुनाव के बाद अब 57 वर्षीय किम इसके प्रमुख के तौर पर दो वर्षों तक अपनी सेवाएं देंगे।

एशिया में वाइस प्रेसिडेंट रहे चुके हैं किम

किम पहले एशिया में इंटरपोल के वाइस प्रेसिडेंट रह चुके हैं। इस पद पर चुने जाने के बाद किम ने कहा कि मौजूदा समय में इस पद की भूमिका काफी बढ़ गई है। ऐसा इसलिए भी है क्‍योंकि वर्तमान में विश्‍वस्‍तर पर पब्लिक सिक्‍योरिटी और सुरक्षा को लेकर चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं। इस पर काबू पाने के लिए हमें अपना दृष्टिकोण स्‍पष्‍ट रखना होगा। उन्‍होंने वर्ष 1992 पुलिस ज्‍वाइन की थी। बाद में वह गियोंगी प्रांत में पुलिस चीफ बने। वह देश में एक जानी-मानी शख्सियत हैं। वर्ष 2015 में रिटायरमेंट के बाद वह इंटरपोल के वाइस प्रेसिडेंट बने। देश में पुलिस की रणनीति K-cop wave के नाम से काफी प्रसिद्ध हो चुकी है। 

मास्‍को में इंटरपोल के प्रमुख हैं एलेक्‍जेंडर 

वहीं एलेक्‍जेंडर पिछले बारह वर्षों से मास्‍को में इंटरपोल ब्‍यूरो के प्रमुख हैं। उन्‍हें क्रेमलिन के काफी करीबी बताया जाता है। इसके अलावा उनकी एक पहचान इंटरपोल के रेड कार्नर नोटिस का अनादर करने से भी जुड़ी है। रेड कॉर्नर नोटिस किसी भी अंतरराष्‍ट्रीय अपराधी की गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल से जारी किया जाता है। एलेक्‍जेंडर की इस चुनाव में हार को रूस के लिए एक बड़े झटके के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि उनकी इस हार पर रूस ने सख्‍त नाराजगी जताई है। रूस की तरफ से बयान जारी कर यहां तक कहा गया है कि इस वैश्विक संस्‍था का राजनीतिकरण किया गया और इसके पीछे रूस के प्रत्‍याशी को हराना था।

रूस से बढ़ी तल्खियां 

आपको बता दें कि बीते कुछ समय में रूस के अमेरिका समेत यूरोपीय यूनियन के सदस्‍य देशों के साथ रिश्‍तों में तल्‍खी आई है। कहा ये भी जा रहा है कि रूस की सरकार इस वैश्विक संस्‍था पर अपने व्‍यक्ति को बैठाकर अमेरिका में अपना वर्चस्‍व कायम करना चाहती थी। माना ये भी जा रहा है कि यदि एलेक्‍जेंडर इस चुनाव को जीतने में कामयाब हो जाते तो इस वैश्विक संस्‍था में रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन का हस्‍तक्षेप बढ़ जाता और इसके जरिये वह अपने राजनीतिक प्रतिद्वदियों को एकतरफ कर सकते थे।

नाराजगी की ये है वजह

यहां पर ये भी ध्‍यान में रखना होगा कि रूस को लेकर जो नाराजगी विश्‍वस्‍तर पर छाई हुई है उसकी एक नहीं कई वजह हैं। इनमें से एक वजह हाल ही में ब्रिटेन में एक रूसी एजेंट और उसकी बेटी की हत्‍या की कोशिश भी है। इसके अलावा एमएच 17 विमान को मार गिराने से भी वैश्विक स्‍तर पर रूस की छवि खराब हुई है। इस विमान में सवार सभी 298 यात्री मारे गए थे। इसके अलावा तीसरा सबसे बड़ा मामला अमेरिकी चुनाव को हैक करने का है, जिसपर अब भी खींचतान चल रही है। हालांकि रूस बार-बार इस आरोप को खारिज करता आ रहा है कि उनके देश का अमेरिकी चुनाव में कोई भी हस्‍तक्षेप था।

रूस के अपने ही हैं खिलाफ

कभी रूस के सबसे धनी व्‍यक्ति रहे मिखाइल खोर्दोकोवोसी का यहां तक कहना है कि रूस को अंतरराष्‍ट्रीय न्‍याय से कोई लेना देना नहीं है वह केवल उनकी ही चिंता करता है जो क्रेमलिन के करीब होते हैं। मिखाइल को वर्ष 2005 में हेराफेरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2013 में राष्‍ट्रपति पुतिन द्वारा उन्‍हें माफ किए जाने के बाद उनकी रिहाई संभव हो सकी। उसके बाद से ही वह स्विटजरलैंड में जीवन व्‍य‍तीत कर रहे हैं। 

Posted By: Kamal Verma