नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन ने दुनिया की दो परमाणु शक्तियों के बीच मतभेद भरे रिश्ते को नए सिरे से शुरू करने पर जोर दिया है। दोनों नेताओं ने सीरिया, यूक्रेन, चीन से लेकर व्यापार शुल्क और अपने परमाणु हथियार जैसे मुद्दे तक पर सहयोग की इच्छा जताई।

भारतीय विदेश मंत्रालय इस संकेत को बेहद महत्वपूर्ण मानता है क्योंकि अमेरिका-रूस के रिश्तों में आई दरार का असर भारतीय हितों पर भी पड़ने के कयास लगाए जा रहे थे। रूस और अमेरिका के बीच तनाव आगे और बढ़ता तो भारत को रूस से हथियार खरीदने में कठिनाई पैदा होती, लेकिन अगर दोनों नेता रिश्तों की गांठ सुलझाने में सफल रहते हैं तो भारत की यह दिक्कत खत्म हो सकती है।

रिश्तों में पूरब-पश्चिम का फर्क रहा बरकरार
पुतिन-ट्रंप मुलाकात से पहले एक दूसरे के चिर प्रतिद्वंद्वी महाशक्ति देशों के राष्ट्राध्यक्षों की मुलाकातें होती रहीं। हालांकि कभी भी नतीजे बहुत उत्साहजनक नहीं रहे।

जोसफ स्टालिन और फ्रैंकलिन रूजवेल्ट,1943
द्वितीय विश्व युद्ध के समय ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित सोवियत दूतावास में दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच बैठक आयोजित हुई थी। दोनों के साथ ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल भी मौजूद थे। इस बैठक में तीनों नेताओं में जर्मन नाजियों के खिलाफ पश्चिम यूरोप में दूसरा मोर्चा खोलने पर चर्चा हुई थी।

ड्वाइट डेविड आइजनहावर और निकिता ख्रुश्चेव, 1959
यह किसी सोवियत नेता की पहली अमेरिकी यात्रा थी। यहां दोनों के बीच हुई बैठक में कई मुद्दों पर बात हुई और उस पर समझौते हुए, जिससे बेहतर संबंधों की आस जगी, लेकिन सोवियत संघ ने 1960 में रूस के ऊपर से गुजर रहे अमेरिकी यू-2 स्पाफ्ट विमान को गिराकर उम्मीदों को खत्म कर दिया।

जॉन एफ केनेडी और ख्रुश्चेव, 1961
इसे शीत युद्ध का सबसे बेपरवाह शिखर सम्मेलन कहा जाता है। दोनों नेताओं ने वियना में मुलाकात की। बाद में केनेडी ने कहा कि ख्रुश्चेव के साथ बैठक मेरे जीवन में सबसे बुरी चीज थी। लिंडन बेंस जॉनसन और एलक्सी कोसिजिन, 1967 इन दो नेताओं की मुलाकात ग्लासबोरों में हुई। शिखर सम्मेलन इजरायल-अरब और वियतनाम युद्ध के खिलाफ आयोजित किया गया था। महत्वपूर्ण समझौते न होने के बावजूद रूस-अमेरिका के संबंधों में सुधार हुआ था।

लियोनिद ब्रेझनेव और रिचर्ड निक्सन, 1972
इस साल दोनों देशों के नेताओं की तीन बार मुलाकात हुई। दो बार मॉस्को में और एक वाशिंगटन में। इस शिखर सम्मलेन में एंटी बैलेस्टिक मिसाइल संधि और परमाणु युद्ध रोकने पर समझौते सहित कई महत्वपूर्ण संधियों पर हस्ताक्षर हुए। निक्सन ने उस समय कहा, यह एक बेहद महत्वपूर्ण समझौता है।

मिखाइल गोर्बाचेव और रोनाल्ड रीगन, 1985
जेनेवा में हुए इस शिखर सम्मेलन में दोनों नेताओं ने रूस-अमेरिका संबंधों को एक नया आयाम दिया। दोनों ने परमाणु हथियारों को कम करने के लिए इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस आइएनएफ संधि पर हस्ताक्षर किए। दोनों ने एक मजबूत रिश्ता विकसित किया था।

बिल क्लिंटन और बोरिस येल्तसिन, 1993
नवनिर्मित रूसी संघ के पहले राष्ट्रपति बने येल्तसिन और बिल क्लिंटन की बीच संबंध मधुर थे। वाशिंगटन में दोनों नेताओं के बीच हुए शिखर सम्मेलन में क्लिंटन ने विभिन्न कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता के रूप में येल्तसिन को मजबूत समर्थन देने का वादा किया।

व्लादिमीर पुतिन और जॉर्ज डब्ल्यू बुश, 2001
दोनों नेताओं ने स्लोवेनिया ने मुलाकात की। आतंकवाद के खिलाफ युद्ध पर मॉस्को की अस्वीकृति और 2008 में जार्जिया पर रूस सैन्य हस्तक्षेप के खिलाफ अमेरिकी विरोध बातचीत के मुख्य बिंदु थे। हालांकि की कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। बाद में बुश ने पुतिन की तारीफ करते हुए कहा था कि मैंने उसे बहुत सीधा और भरोसेमंद पाया।

पुतिन और ओबामा, 2016
चीन के हांग्जो में जी-20 शिखर सम्मलेन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। इस बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति ने विशेष रूप से साइबर सुरक्षा के संबंध में महाशक्तियों में पनपे अविश्वास को लेकर चिंता व्यक्त की थी। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal