मक्का पैक्ट की परीक्षा में मुनीर फेल: MBS की मदद से क्यों पीछे हट रहे पाक फील्ड मार्शल
पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर हुती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब की मदद करने से हिचकिचा रहे हैं, जबकि दोनों देशों के बीच 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' है।
-1789399106293_m.webp)
पाक सेना प्रमुख मुनीर सऊदी अरब की मदद से पीछे हटे

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। पिछले हफ्ते जब हुती विद्रोहियों ने मोखा और पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया, तब पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असिम मुनीर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत कर रहे थे। यह सिर्फ संयोग नहीं लगता है।
मुनीर सऊदी अरब पर हमला करने वाली ताकतों के खिलाफ पाकिस्तानी सेना को तुरंत लामबंद करने की कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रहे। यह रुख इसलिए अहम है क्योंकि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) ने पाकिस्तान और तुर्की के साथ मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट किया था।
MBS की मदद से पीछे हट रहे मुनीर
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल मुनीर के लिए ईरान के साथ सीधे टकराव से बचने के कारण सऊदी अरब की ओर से युद्ध में कूद पड़ने के कारणों से कहीं ज्यादा मजबूत हैं। क्षेत्रीय समीकरण, सुरक्षा चिंताएं और रणनीतिक तैयारी उनकी इस सतर्कता को अच्छे से समझाती हैं। नतीजतन, सऊदी-पाकिस्तान रक्षा साझेदारी की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने सितंबर 2025 में ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर किए थे। अगस्त 2026 में इसे तीन देशों वाले 'मक्का पैक्ट' में बदल दिया गया। इसका संयुक्त सचिवालय रियाद में है और पाकिस्तान के पास पहले तीन साल की अध्यक्षता है।
अब तक इस समझौते का इस्तेमाल कभी नहीं किया गया। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस हफ्ते कहा कि सऊदी अरब पर बिना उकसावे के हमले या यमन युद्ध के फैलने की स्थिति में मक्का समझौता लागू हो जाएगा। उन्होंने कहा, 'इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए,' हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि व्यवहार में ऐसा कैसे होगा।
मक्का समझौते में क्या है शर्ते?
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने इस समझौते के काम करने के तरीके की तुलना NATO से की है, जिसके तहत हमला होने पर सदस्य देश खास मदद मांगते हैं, न कि अपने-आप दखल शुरू हो जाता है। इस बात पर ज्यादा साफ जानकारी नहीं है कि मक्का समझौते का कोई सदस्य देश दूसरों से मदद कब मांगेगा?
किन हालात में किसी सदस्य पर हमले को सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा? यह साफ नहीं है कि सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान से मदद मांगी है या नहीं।
अमेरिकी Axios की एक रिपोर्ट के मुताबिक, MBS ने हूतियों के खिलाफ अमेरिकी मदद पाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से संपर्क किया था। लेकिन ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस की मदद करने से इनकार कर दिया। अहम बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान सैन्य तौर पर सऊदी अरब का साथ देने में नाकाम रहा है।
हुतियों के खिलाफ सीधे टकराव से क्यों बच रहा पाक
हूतियों के खिलाफ किसी हमले में शामिल होने से सऊदी के लिए पाकिस्तान का समर्थन ईरान और उसके सहयोगियों के साथ टकराव में बदल सकता है। पाकिस्तान में शिया आबादी भी काफी है और अगर वह सऊदी अरब-हूति लड़ाई में सीधे दखल देता है, तो उसे घरेलू विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
मुनीर ने पिछले एक साल में डोनल्ड ट्रंप के साथ संबंध बेहतर करने पर ध्यान दिया है। चूंकि ट्रंप ने हूतियों पर अमेरिकी हमले के लिए सऊदी अरब के अनुरोधों को दो बार ठुकरा दिया है, इसलिए मुनीर के ऐसे किसी रुख को अपनाने की संभावना कम है जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ उनके मतभेद हों, खासकर ऐसे मुद्दे पर जिस पर ट्रंप पहले ही अपना रुख़ साफ कर चुके हैं।
